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शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

मनरंजन नहीं चितरंजन है: सरल सागर

मनरंजन नहीं चितरंजन है: सरल सागर


//विन्द्रावन विश्वकर्मा//

घुवारा(छतरपुर)। नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के योग्य शिष्य आध्यत्म योगी एकांत प्रिय मुनि श्री सरल सागर जी महाराज ने चातुर्मास स्थापना के अवसर पर अपने उपदेश में कहा, यह प्राणी निरंतर इन्द्रयों के भोगोपभोग में संलग्न रहता है। आत्मा की ओर आकर्षित कभी नहीं होता।
    मुनि श्री ने कहा चातुर्मास में जीवों की उत्पत्ति अधिक होने से विहार संभव नहीं होता, अतः एक स्थान पर प्रवास करना होता है।इस विधि में साधु का विहार रुक जाने से एक नगर में ही रुकने से उनकी सिंह वृत्ति वाधित हो जाती है। चर्या पराश्रित हो जाती है।अतः साधु को अपने व्रतों के प्रति सदैव तत्पर रहना चाहिए। प्रमाद पूर्ण चर्या पतन का कारण बन जाती है। साधु के परिणाम वीतरागता के रहे,आत्म साधना सतत होती रहे।
   मुनि श्री कहते हैं कि श्रावक साधु की संगति में अपने वैराग्य एवं संयम साधना की वृद्धि  करे उनकी साधना में सहयोगीबने ।भौतिक संसाधनों से उन्हें दूर रखें,लौकिक कार्यों में न उलझाएं, पारिवारिक कृत्यों की चर्चा न करके  धार्मिक चर्चा करें।शंका  समाधान करके जिनवाणी का श्रद्धान बाधाएं।
 धर्म तलवार की धार पर चलने का मार्ग है,उन्हें साधना से स्खलित न करें। साधुओं से अपेक्षा न करके भगवान पर श्रद्धान करके जीवन को मंगलमय वनाएँ। मंदिर के निर्माण कार्य से दूर रखें।
 नवागढ़ क्षेत्र पर विराजित सरल सागर जी महराज के दर्शनार्थ हेतु सागर,बेगमगंज,खिमलासा,शाहपुरा भिटौनी,पिपरई,बबीनाके अतिरिक्त क्षेत्रीय समाज के सैकड़ों श्रावक आकर पूण्य अर्जित करते हुये धन्य ही रहे हैं।

की गई भव्य कलश स्थापना।

 चातुर्मास स्थापना के पूर्व संत शिरोमणि आचार्य श्री की संगीतमय पूजा पुष्पेंद्र ककरवाहा के साथ क्षेत्र निर्देशक ब्र जय कुमार निशांत भैया ने कराई।तत्पश्चात मुनि श्री की पूजन करके पूण्य लाभ लिया।पाद प्रक्षालन शास्त्र भेंट किया गया।क्षेत्र के अध्यक्ष सनत कुमार ऐड,महामंत्री योगेंद्र बबलू,मंत्री अशोक मैनवार,कैलाश ककरवाहा कोषाध्यक्ष नरेंद्र मैनवार, राजकुमार चूना, वीरेंद्र सपोंन, देवेंद्र चौधरी घुवारा,संरक्षक दयाचंद, बाबूलाल मैनवार चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अजित वैसा,महामंत्री वीरचंद नेकोरा,मंत्री सुनील घूवारा,कोषाध्यक्ष राकेश ककरवहा,ऑडिटर देवेंद्र बुंदेलखंड ने सभी से क्षेत्र वंदना तथा मुनि भक्ति से धर्म हेतु आग्रह किया।