आदिवासी पहुंचे तहसील दरबार,तहसीलदार से लगाई गुहार।
ज्ञापन सौंपकर जमीनी पट्टा दिलाने की मांग।
//रूपेश जैन,अम्मू सोनी//
बकस्वाहा(छतरपुर)। सरकारे भले ही आदिवासियो को अपने स्तर से न्याय तथा रहने के लिए जगह एवं पट्टे देकर संतुष्ट करने जैसी बाते कहती हो मगर हकीकत कुछ और ही नजर आती है।मामला तहसील बकस्वाहा अंन्तर्गत ग्राम कर्मा,हरीपुरा,गोरानांद,डूगासरा का है जहाँ पर जानकारी के मुताबिक आदिवासी बीते चालीस वर्षो से वन परिक्षेत्र की भूमि पर खेती कर अपना जीवन वसर करते आ रहे है।
अत: वन विभाग की भूमि होने के कारण उक्त जगह से पिछले साल वन विभाग द्वारा कार्यवाही करते हुये उस जगह से आदिवासियों को शासकीय भूमि से हटाया गया था जिस पर नाराज ग्रामीण आदिवासियों ने जब हड़ताल की तो अनुविभागीय अधिकारी ने दो माह के अंन्तर्गत जमीन आवंटित करने तथा पट्टा दिलाने की बात कही थी लेकिन तब से आदिवासियों को अपने निवास तथा खेती करने के लिए न तो भूमि प्राप्त हुई तथा न ही पट्टे दिलवायें गये।
तथा नाराज ग्रामीण आदिवासियों का कहना है कि उसके बाद अब फिर से वन विभाग द्वारा हमें हटाया जा रहा है तो वही हमारी एकमात्र आर्थिक आधार खेती को भी अब नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
जिस पर गुरूवार के दिन नाराज आदिवासियों द्वारा संयुक्त रूप से तहसील परिसर बकस्वाहा में एकत्रित होकर तहसीलदार के माध्यम से कलेक्टर,वन मंण्डल अधिकारी तथा अनुविभागीय अधिकारी के नाम एक लिखित ज्ञापन सौपा गया जिसमें मांग करते हुये कहा गया कि श्रीमान जी हम लोगो के लिए पट्टा दिलाया जाये तथा अगर सात दिन के अंन्तर्गत अगर कोई कार्यवाही नही होती है तो हम लोग भूख हड़ताल पर बैठने के लिये बाध्य होगे जिसकी सारी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।