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शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

सरकारी योजना महज औपचारिकता,लाभ लेने को कराये विवाह।

सरकारी योजना महज औपचारिकता,लाभ लेने को कराये विवाह।


//अक्षय जैन//

बड़ामलहरा(छतरपुर)।  कन्यादान न फेरे फिर भी हम तेरे इसी तर्ज पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सिद्ध क्षेत्र अबार माता मंदिर परिषर में गुड्डे-गुडिओ की तरह लगभग दो सैकड़ा शादियां कराई गई।
नव दंपति जोड़े की भंवर के लिए परिसर में मंडप सजाया गया लेकिन विवाहित जोड़ो ने यहां फेरे नही लिए।
 औपचारिक सहभागिता के बाद विवाहित जोड़े अपने अपने घर वापिस लौट गए विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोराई अन्तर्गत सिद्ध क्षेत्र अबार माता मंदिर परिसर में बुधवार को जनपद पंचायत द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया गया।
 विभाग की माने तो करीब ८० जोड़ो का ऑनलाइन पंजीयन किया गया था सुबह ११ बजे से लेकर देर शाम तक करीब २०० जोड़ो को दाम्पत्य सूत्र  में बांधा गया। विवाहित मंच पर दूल्हा दुल्हन एक दूसरे के गले में माला पहनाने के बाद मंडप में पहुंचे लेकिन यहां जोड़ो ने फेरे नहीं लिए और न ही कन्यादान हुआ मंडप में मौजूद पंडित और टीकमगढ़ जिला के कुंडेश्वर से शमिल एक दंपति से पूछने पर उनहोंने बताया कि ७ फेरे और ७ बचन पहले हो चुके है।

यह है पूरी योजना,जिसका बना मजाक।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना का उददेश्य गरीब जरूरतमंद बेसहारा लोगो की बेटियों/विधवाओं तलाकशुदा महिलाओं की शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना साल २००६ में इसे मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के नाम से शुरू किया गया था। लेकिन नवम्बर २०१५ में इसका नाम मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना के दिया गया था इस योजना के तहत सामूहिक विवाह करने वाली सभी कन्याओं की शादी पर सरकार प्रत्येक पर ५१ ०००  खर्च करती है विवाह सम्मेलन में अनेक ऐसे जोड़े शमिल हुए जिनका हिन्दू रीति रिवाज के साथ पिछली तिथियों में विवाह संपन्न हो चुका है या फिर आने बाली तिथियों में होना तय है शासन के नियमो के विपरीत इन जोड़ो ने सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल होकर अनर्गल तरीके से लाभ लिया है नियमानुसार कन्या एवं कन्या के अभिभावक मध्य प्रदेश के मूल निवासी होना जरूरी होता है शादी कर रहे जोड़े में बेटी १८वर्ष तथा उसका होने ब लेे  पति की उम्र २१ वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए इसके आलवा कन्या का नाम समग्र विवाह पोर्टल पर रजिस्टर भी होना चाहिए ऐसी परित्क्या महिला जो निराश्रित हो और स्वयं के विवाह के लिए सक्षम न हो और उसका कानूनी तौर पर तलाक हो चुका हो बे भी इस योजना का लाभ ले सकती है ऐसी विधवा महिलाएं जो निराश्रित हो प्र स्वयं के विवाह के लिए  आर्थिक रूप से सक्षम न हो नव दंपति अच्छे से अपनी ग्रहस्ती बसा सके इसके लिए योजना अंतर्गत ४३ ००० रुपए कन्या के बचत खाते में जमा किए जाते है कन्या के विवाह संस्कार में लगने वाली सामग्री के लिए ५०००  रुपए खर्च किए जाते है सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने बाली संस्था को ३ ००० रुपए प्रति कन्या के हिसाब से दिए जाते है इस प्रकार सरकार ५१ ००० हजार रुपए प्रति जोड़े पर खर्च कर रही है।