प्रतिदिन जानलेवा खतरों का सामना झेलते हैं यह स्कूली बच्चे।
सरकार एक शिक्षित देश देखना तो चाहती हैं मगर प्रशिक्षित परिवेश देना नही चाहती।
//गगन सेन,राजन असाटी//
जुझार/दमोह। शिक्षा का स्तर सुधारने भले ही सरकार के द्वारा लाखों रुपए का बजट व्यवस्थाओं को बनाने दिया जाता हो, लेकिन ग्रामीण अंचलों तक क्या यह राशि पहुंचती है इसका जीता जागता उदाहरण आप जुझार में देख सकते हैं जिसका खामियाजा इन दिनों छात्रों को भुगतना पड़ता रहा है मामला है जनपद शिक्षाकेंद्र दमोह के ग्राम जुझार के प्राइमरी मिडिल स्कूल भवन की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि छात्रों को पढ़ाई करने काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है एवं स्कूल की छत जर्जर होने के कारण बारिश के चलते स्कूल भवन के सभी कमरों में छत से पानी टपकने के कारण कमरों में पानी भर जाता है जिसके कारण चारों ओर कीचड़ के समान कचरा फैला हुआ है जिससे बच्चों को बैठने के लिए तक जगह नहीं है स्थिति यह है कि दस साल पहले बनी स्कूल भवन की दीवारों में हाथ लगाते ही प्लास्टर भी कई जगह से गिर रहा है वही भवन की छत भी कमजोर हो गई है जिससे हादसे का डर भी हर पल बना हुआ है स्कूली बच्चों को बैठने के लिए भी पर्याप्त फर्श नहीं है इन परेशानियों के बीच छात्रों को पढ़ाई करनी पड़ रही है शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष परम सेन जीवन आदिवासी शिक्षक दिप्पाल सिंह ठाकुर शिक्षक प्रभु दयाल तिवारी ने बताया कि हम लोग शिकायत कर के थक गए हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।