भीमकुण्ड क्षेत्र भू-वैज्ञानिक के शोध और विद्यार्थियों के फील्ड वर्क के लिए सर्वोत्तम क्षेत्र।
● महाराजा महाविद्यालय के छात्र ने भूवैज्ञानिक अध्ययन कर भीम कुण्ड के रहस्यों के खोजे राज।
ब्यूरो नेटवर्क छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला मुख्यालय से 70 किलो मीटर दूर विन्ध्याचल पर्वत श्रेणी पर ग्राम पंचायत बाजना के अंतर्गत भीमकुण्ड नाम का अतिप्रसिध्द कुण्ड मौजूद है।
जिसके बनने,गहराई,पानी में प्राकृतिक आपदा के समय हलचल और नीला रंग दिखाई देने के रहस्यों की वास्तविकता का राज आज तक नहीं खुल सका है।स्थानीय लोगों से सुनने मिलता है कि डिस्कवरी चैनल,भारतीय सेना के गोताखोरों और कई टीवी चैनलों द्वारा भी इस कुण्ड की पड़ताल की गई।लेकिन खाली हाथ वापिस लौटना पड़ा।
छतरपुर स्थित शासकीय महाराजा महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र मदन साहू पिता श्री चिरौंजीलाल साहू को जब इन आश्चर्यजनक रहस्यों का पता चला तो उन्होंने इन रहस्यों को सुलझाने,क्षेत्र का भूवैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए कदम बढ़ाया।उन्होंने बताया कि भीमकुण्ड के रहस्यों की वास्तविकता जानने उनके द्वारा भीमकुण्ड क्षेत्र का दो वर्ष तक भूवैज्ञानिक अध्ययन किया गया।जिस दौरान भीमकुण्ड सहित क्षेत्र से जुड़े कई भूवैज्ञानिक तथ्यों की पहचान की गई और इन्हीं तथ्यों की मदद से भीमकुण्ड के रहस्यों कीे वास्तविकता के राज खोजने में मदद मिली।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से निर्मित भीमकुण्ड सहित इस क्षेत्र में भीमकुण्ड से 5 किमी दूर अर्जुन कुण्ड,15 किमी दूर सड़वा की गुफा और जटाशंकर के समीप स्थित लगभग 12 किमी दूर मोनासईया गुफा व झरनों का पाया जाना,भूगर्भशास्त्र की दृष्टि से कार्स्ट क्षेत्र को इंगित करता है।इस क्षेत्र में अपक्षरित चूनापत्थर,फेरस बलुआ पत्थर व डोलोमाइट चट्टानें पायी जाती है।जो पानी में आसानी से घुल जाती है और इस प्रकार की विभिन्न संरचनाओं का निर्माण करती हैं।
इस क्षेत्र में गुफाएं,प्राकृतिक सुरंगें,कंदरायें,चट्टानों में एलिफेंट स्किन अपक्षरण सहित और भी अन्य कई कार्स्ट स्थलाकृतियां देखने को मिलती है।
उन्होंने भीमकुण्ड के वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर रहस्यों की वास्तविकता के प्रमाणों की जानकारी देते हुए बताया कि भीमकुण्ड में चूनापत्थर व फेरस बलुआ पत्थर प्रमुख रूप से मिलता है।भीमकुण्ड भूवैज्ञानिक रूप से भी विश्व में पायी जाने वाली दुर्लभ कार्स्ट स्थलाकृतियों में से एक है,क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से निर्मित बाह्य गुफा,अंडर ग्राउंड केव,प्राकृतिक सुरंग और डोलाइन कार्स्ट स्थलाकृतियों के एक साथ समूहन के रूप में स्थित है।अनुमान है कि कुण्ड के रूप में दिखाई देने वाली जलमग्न स्थलाकृति अंडर ग्राउंड गुफा का रूप है।
जो चट्टान का कुछ हिस्सा धंसने या घुलने से निर्मित हुई है।इस अंडर ग्राउंड केव में अंडर ग्राउंड वाटर का प्रवाह भी है।जिससे अनुमान है कि केव आंतरिक रूप से विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई है और अंडर ग्राउंड वाटर के सीधे सम्पर्क में है। इसकी अधिकतम गहराई 500 मीटर तक और चौड़ाई कई किलोमीटर तक होने का अनुमान है।जिसको आधुनिक उपकरणों जैसे ईको साउंडर आदि के द्वारा सटीकता से मापा जा सकता है। कुण्ड रूपी दिखाई देने वाली अंडर ग्राउंड केव में अत्यंत गहराई तक मौजूद स्वच्छ पानी में प्रकाश के प्रकीर्णन की घटना के कारण कुण्ड का पानी देखने पर गहरा नीला दिखाई देता है।अंडर ग्राउंड केव का विस्तृत क्षेत्र में फैलाव होने से उसमें मौजूद पानी धरती की आंतरिक सूक्ष्म हलचलों से भी सीधे प्रभावित होता है। परिणामस्वरूप समय-समय पर तीव्र हलचलें कुण्ड में मौजूद पानी द्वारा प्रदर्शित होती है।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में पर्यटन के रूप में अनेक रमणीय स्थल तो है ही, साथ ही भूवैज्ञानिकों के लिए शोध के लिए अपार संभावनाएं संजोए हुए,रहस्यों से भरा चुनौतीपूर्ण क्षेत्र भी है।यह भूगर्भशास्त्र के विद्यार्थियों के फील्ड वर्क के लिए भी उत्तम क्षेत्रों में से एक है।
अपनी इस रचनात्मक उपलब्धि का श्रेय उन्होंने शासकीय महाराजा महाविद्यालय छतरपुर के भूगर्भशास्त्र विभाग को देते हुए बताया कि अध्ययन के दौरान तथ्यों को समझने में उनको महाराजा महाविद्यालय के भूगर्भशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, प्रोफेसर डाॅ पी के जैन,अतिथि विद्वान राहुल ताम्रकार,ज्योति त्रिपाठी व अल्ताफ हुसैन के द्वारा महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
वहीं महाराजा महाविद्यालय के ही छात्र सुरेंद्र कुमार सेन ने क्षेत्र के साक्ष्यों को जुटाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।देश के विभिन्न हिस्सों मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् भोपाल,जियोलाॅजिकल सर्वे आॅफ इंडिया जी एस आई के भूवैज्ञानिकों और ककटिया विश्वविद्यालय वारंगल के डाॅ जी पपन्ना आदि द्वारा प्रदान की गई अध्ययन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी के लिए भी उन्होंने आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया।
