गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में धड़ल्ले से बेची जा रही शिक्षा।
//दिलीप अग्रवाल//
बड़ामलहरा(छतरपुर)। गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संचालन मामले की जांच के नाम पर अधिकारी लीपापोती करनें में लग गये है। शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल को कोचिंग सेंटर बता रहे है। मामला उजागर होनें के 2 दिन बाद जांच अधिकारियों की टीम ग्राम सेवार पहुंची। जांच टीम को स्कूल में आधा सैकडा से अधिक बच्चे व 3 अन्य लोग उपस्थित मिले। बच्चों व शिक्षकों की उपस्थित पंजी अभी जांच टीम के हाँथ नहीं लगी।
बीईओ एसएल प्रजापति के निर्देश पर शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संकुल केंद्र घुवारा की प्राचार्य अलका शुक्ला गुरुवार सुबह साढे 11:30 बजे ग्राम सेवार पहुंची और उन्होनें स्वर्गीय बाबू सिंह पब्लिक स्कूल की जांच शुरु कर दी। जांच अधिकारी ने बताया कि, स्कूल में 58 बच्चे उपस्थित थे। पूंछ्ने पर बच्चों ने बताया कि, वह नजदीकी गांव ढडोरा, भदौरा, हलावनी व अन्य स्थानों से यहाँ रोज पढने आते है। इसके अलावा स्कूल में 2 युवतियां व एक युवक बच्चों को पढाते मिला है हालांकि पूंछने पर उन्होने अपने आपको शिक्षक स्वीकार नहीं किया। जांच अधिकारी के अनुसार स्कूल में छात्र व शिक्षक उपस्थिति पंजी नहीं मिली। संदिग्ध मामले का जांच प्रतिवेदन व ग्रामीणों का पंचनामा तैयार कर लिया है। वह बताती है कि, सेवार में पढ रहे बच्चों के नाम नजदीकी शासकीय शालाओं में दर्ज बताऐ गये है। विद्यलीन समय में यह बच्चे यहाँ बैठकर कैसे पढाई कर रहे है। यह जांच का बडा विषय है, बारीकी से जांच की जा रही है। दोषी मिलने पर शासकीय विद्यालयों के जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाऐगी।
● विद्यालय को कोचिंग सेंटर बताकर डाला जा रहा पर्दा।

गैर मान्यता प्राप्त स्कूल मामला मामले को अधिकारी दबाने में लगे है। वह स्कूल को कोचिंग सेंटर बताकर अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने की जुगत में लगे है। बताया जाता है कि, ग्राम पंचायत सेवार में सुबह 9:30 से दोपहर 2:30 बजे तक विद्यालय संचालित किया जाता है। स्कूल में 70 बच्चे दर्ज है और कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों से 35 सौ रुपये व 6वीं से 8 वीं तक के बच्चों से 45 सौ रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है। भवन के बाहर स्वर्गीय बाबू सिंह पब्लिक स्कूल के नाम साइन बोर्ड लगाकर स्कूल संचालित किया जा रहा है। प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन केर बैनर तले विगत 19 जनवरी को सामान्य ज्ञान परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा में निजी विद्यालयों छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया था। परीक्षा की तैयारी के लिये एसोसिएशन ने एक पुस्तक छापकर बच्चों को बेचीं भी इसमें अन्य प्रायवेट स्कूल्स के अलावा स्वर्गीय बाबूसिंह पब्लिक स्कूल सेवार का विज्ञापन प्रकाशन भी किया गया है। हालांकि अधिकारियों व स्कूल संचालक की जुगलबंदी के बाद भवन के बाहर लगा साइन बोर्ड हटा दिया गया। बीआरसी महेश विश्वकर्मा से पूंछने पर वह बताते है कि, वह विद्यालय नहीं है बल्कि कोचिंग सेंटर है। भवन के बाहर कोचिंग सेन्टर का बोर्ड लगाया गया है। हालाकि, मांगने पर उन्होने फोटो ग्राफ्स उपलब्ध नहीं कराये है। साथ ही वह कहते है कि, सेवार में मान्यता प्राप्त को भी निजी विद्यालय संचालित नहीं है। स्वर्गीय बाबूसिंह पब्लिक स्कूल में पढ रहे बच्चों के नाम नजदीकी शासकीय शालाओं में दर्ज है।
● दाखिला शासकीय स्कूल में,पढाई निजी स्कूल में।
शिक्षा विभाग की उदासीनता से समूचे विकासखंड क्षेत्र में शिक्षा का व्यापार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग की छत्र-छाया में जगह जगह कोचिंग सेंटर व गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संचालित किये जा रहे है। ऐसे मामले उजागर होनें के बाद अधिकारी ले देकर निपटा देते है। खंड क्षेत्र में 268 प्राथमिक व 94 माध्यमिक शालाऐं संचालित है। इन स्कूल्स में रोजाना 50 प्रतिशत से कम बच्चों की उपस्थिति होती है बिखं.क्षेत्र में 57 निजी विद्यालय है इनमें बडामलहरा 22, भगवां 10, घुवारा 12, बंधा, सैरोरा, जसगुवांकला, फुटवारी, सडवा, रामटौरिया, बमनौराकलां, महाराजगंज, द्रोणागिरि, भोयरा, धनगुवां, पनवारी, मुंगवारी में एक एक मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संचालित है। जबकि, इन स्कूल्स में दर्ज बच्चों की उपस्थित से अधिक छात्रों की उपस्थित हो रही है। असल में, साइकिल वितरण, पुस्तक वितरण, गणवेश राशि जैसी अनेक शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिये ग्रामीण अपने बच्चों का दाखिला शासकीय शालाओं में कराये है और अस्थाई प्रवेश दिलाकर निजी विद्यालयों में बैठाकर कर बच्चों को पढा रहे है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता से प्रत्येक सत्र में सरकार को शासकीय योजनाओं ने नाम पर करोडों रुपये का चूना लग रहा है। अधिकारी शासकीय शालाओं व निजी विद्यालयों की जांच करे तो शासकीय शालाओं से अनुपस्थित छात्र-छात्राऐं निजी विद्यालयों में पढाई करते मिल सकते है।

● इनका कहना है कि.....
“गैर मान्यता प्राप्त स्कूल की शिकायत लिखित में प्राप्त नहीं हुई, वाट्सएप व समाचार पत्रों की कतरनों के आधार पर जांच कराई जा रही है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई की जाऐगी।“
एसएल प्रजापति विकासखंड शिक्षा अधिकारी बडामलहरा