पंचकल्याणक : आज भगवान का तपकल्याण हुआ संपन्न।
//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
घुवारा(छतरपुर)। श्रीमज्जिजिनेन्द्र शान्तिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं विश्वशान्ति महायज्ञ में 25 फरवरी मंगलवार की संध्याकालीन श्रीजी की आरती के पश्चात,शास्त्र सभा हुई,तत्पश्चात स्वर्गों के देवताओं द्वारा किये जाने वाले नृत्य का मंचन किया गया।फिर कलाकार मंचसंचालक चक्रेश जी सोजना एवं उनके सहयोगियों द्वारा तीर्थंकर बालक शान्तिनाथ जी को अपने बाल सखाओं के साथ बालक्रीड़ाएं आयोजित की गयी।
बालक तीर्थंकर बनने का सौभाग्य डॉक्टर अरुण कुमार जी बारौ के सुपुत्र अजेय जैन ने प्राप्त कर अनेक नन्हें-मुन्हें राजकुमारों के साथ मंच पर रस्सा-कसी आदि क्रीड़ाएँ करने के अभिनय किये। बालक्रीड़ा के माध्यम से समाज को परस्पर प्रेम भाव से मिल-जुलकर रहने का संदेश दिया गया। शान्तिनाथ जी को पालना झुलाया गया सभी समाज के आबाल-वृद्धों ने श्रीजी को पालना झुलाकर पुण्यार्जन किया।सर्वप्रथम पालना झुलाने का सुअवसर श्री राजेन्द्र कुमार जी अन्तौरा वाले बड़ागाँव परिवार ने प्राप्तकर श्रीजी को पालना झुलाया।
26 फरवरी बुधवार को प्रातःकालीन श्रीजी का अभिषेक,पूजन,तपकल्याणक विधान एवं मुनिश्री विरंजनसागर जी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। तदुपरांत नगर में चक्रवर्ती की भव्य दिग्विजय यात्रा मुख्यमार्गों से होकर निकाली गई,लोगों ने चक्रवर्ती जी का सम्मान द्वार-द्वार पर किया एवं समुचित भेंट प्रदान की।
द्रोणप्रान्तीय नवयुवक संघ के उपाध्यक्ष रविन्द्र जैन रवि ने समस्त जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि-
पण्डित श्री नन्हें भाई जी सागर,श्री उदयचंद्र जी सागर,श्री शुभम् जी बड़ामलहरा एवं स्थानीय विद्वानों के कुशल निर्देशन में समस्त कार्यक्रम आगमोक्त विधि से संचालित किए जा रहे हैं। घुवारा नगर में धर्ममय वातावरण प्रातः काल से रात्रि तक बना हुआ है।
दोपहर में 1 बजे भगवान शांतिनाथ जी ने अपने समस्त वैभव,महल,हस्तिनापुर राज्य,परिजनों आदि का त्यागकर भव्य जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर आत्म कल्याण के मार्ग को अपनाया। कलाकार चक्रेश जी सोजना द्वारा तपकल्याणक की झलकियों को मंच पर बड़े ही मार्मिक और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया। शान्तिकुमार दीक्षा लेकर हस्तिनापुर से जा रहे हैं परिजन,पुरजन, सभी उनको अश्रुपूरित नयनों से रोक रहे हैं लेकिन शान्तिनाथ जी सबको तृणवत छोड़कर मुनिमुद्रा धारण कर आगे बढ़ते जा रहे हैं।और अपनी तपस्या में लीन हो गए वैराग्य के आगे राग और रागी परास्त हो गए।