//राजीव रंजन कुमार//
नेटवर्क छपरा। एक बारात जो दिनांक 22 मार्च 2020 को पश्चिम बंगाल से सारण के इनायतपुर मांझी छपरा में आई हुई थी।जहां धूमधाम से निकाह शादी कुबूल हुआ और जमकर भोज भी उड़ाई गई बारातियों द्वारा।लेकिन तभी अचानक सभी बारातियों पर एक बड़ा पहाड़ सा टूट पड़ा।आपकों बता दें कि अगले ही दिन कोरोनावायरस को लेकर लॉक डाउन कानून लागू हो जाने के कारण यह बारात विदा नहीं हो सकी।
जहां इससे एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई की आखिर
अब इतने लोगों को रखा जाए तो कहां रखा जाए।वहीं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा थक हार कर पास के एक स्कूल ठहरने की व्यवस्था कर दी गई।जहां साथ ही लड़की पक्ष वाले लोग और गांव वालों के सहयोग से खाद्य सामग्री राशन का भी इंतजाम कर दिया गया। तभी अचानक कुछ दिनों बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद से सभी बारातियों को पास जारी किया गया जहां एक बार पुनः दुल्हन की बिदाई की गई।वहीं जब बारात छपरा से वापसी करते हुए झारखंड राज्य बॉर्डर पर पहुंचीं तो वहां के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस जारी किए गए पास को मानने से इंकार कर दिया गया।जहां एक बार फिर से सभी बारातियों को वापस बैक टू वापस छपरा भेज दिया गया है। जहां सभी लोगों को फिर से उसी स्कूल में ठहराया गया है।वहीं जब इस बात की भनक आसपास के सभी स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया ग्रुप के लोगों को पता चली तो सभी लोगों ने दिल खोलकर अपने स्तर से सभी आवश्यक खाद्य सामग्री राशन उपलब्ध कराई।जहां दूल्हे राजा लगातार दो बार दुल्हन को विदाई कराने में असफल साबित हुए हैं।वहीं खबरों के मुताबिक सभी बाराती पश्चिम बंगाल के बंदिल जंक्शन के पास स्थित भिखमहि गांव से सारण छपरा के मांझी में आए हुए थे।

