//रमेश अग्रवाल//
नेटवर्क पन्ना। ज्येष्ठ मास की चिलचिलाती धूप में खुले में पवित्र तीर्थों के सुगंधित जल की सहस्त्रधाराओं के स्नान से भगवान जगन्नाथ को लू लग गई। इससे वे बीमार पड़ गए हैं।भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह में ले जाकर सिंहासन पर आरूढ़ किया गया है। उन्हें गर्म कपड़े पहनाए गए हैं, जिससे पसीना आने पर बुखार उतर सके। भगवान को लू लगने और ज्वर आने की बात से भले ही आप चौंक गए हों, लेकिन उनके बुखार से पीड़ित होने और स्वस्थ होने पर रथयात्रा निकाले जाने की यह परंपरा मंदिरों के शहर पन्ना में सदियों से चली आ रही है।
जगन्नाथ मंदिर के पुजारी ने बताया कि परंपरानुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी पर इस वर्ष भी पांच जून को दोपहर में पवित्र तीर्थों के सुगंधित जल से भगवान बलभद्र, बहन सुभद्रा और जगत के साथ भगवान जगन्नाथ स्वामी को हजारों छिद्र वाले घड़े से स्नान कराया गया। धूप और तपिश में स्नान होने से भगवान को लू लग जाती है, जिससे वे बीमार पड़ जाते हैं। जगन्नाथ स्वामी के बीमार होने का यह धार्मिक आयोजन यहाँ बड़ा दिवाला मंदिर में भक्ति भाव के साथ होता है।उन्होंने कहा कि अस्वस्थ्य होने पर भगवान को गर्म कपड़े पहनाने और अन्य जतन किए जाने के बाद भी उनका ज्वर जल्दी नहीं उतरता। आगामी आषाढ कृष्ण अमावस्या पर भगवान स्वस्थ्य होंगे और अगले दिन उन्हें धूप कपूर की झाँकी लगाई जाती है। दूज के दिन भगवान रथ पर सवार होकर निकलते हैं और यह रथयात्रा दो दिन बाद पन्ना से पाँच किलोमीटर दूर जनकपुर पहुँचती है।
