✍️ - हमारा आज का सबसे बड़ा सवाल खुद से यही है कि हम क्या चाहते हैं हमारे पेड़ हमारा जंगल या हीरे
ऐसे ही हमारे मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित वकस्वाहा जोकि पन्ना से सटा हुआ है हाल ही में जो चर्चे में चल रहा है क्यों?
बकस्वाहा यह विशाल प्रकृति की धरोहर को संभाले हुए हैं यहां के जंगलों में अमूल्य औषधि वाले पेड़ हैं जैसे- सागौन, केम, बहेडा, पीपल, तेदू, अर्जुन, केे पेड़, पलाश आदि वृक्षों से समाहित हैं यहां पर तेंदुआ बाघ भालू बारहसिंघा हिरण खरगोश मोर आदि नाना प्रकार के पशु पक्षियों से भरा हुआ है तो हम और आप सोच ही सकते हैं कि यह कितने बहुमूल्य सौंदर्य की पूंजी है हाल ही में यह अनुमान लगाया गया है यहां 3.42 करोड़ कैरेट के हीरे दबे हुए हैं जिनको निकालने के लिये 2.15 लाख हरे भरे पेड़ो को काटा जायेगा
• इसकी शुरुआत कब हुई:-
2002 में अनुमान लगाया गया था कि यहां सबसे बड़ा हीरे का भंडार है जो कि पन्ना के माझगवा की हीरे की खदान से 15 गुना ज्यादा है
इसके बाद 2007 से 2010 के बीच ऑस्ट्रेलियन कंपनी को लेकर रियो टिंटो आए थे जिन्होंने यहां खनन लीज के लिए आवेदन किया लेकिन मई 2017 मैं संशोधित प्रस्ताव पर पर्यावरण मंत्रालय के अंतिम फैसले से पहले ही रियो टिंटो ने यहां काम करने से इंकार कर दिया था,
कई लोगों का कहना है कि सरकार के बीच आपसी मतभेद के कारण यह काम रोक दिया गया था
और कई लोगों का कहना है कि जियोलॉजी एव माइनिग मध्य प्रदेश और रियो टिंटो कंपनी की रिपोर्ट में विभिन्न प्रकार के पशु पाए गए थे इस कारण यह काम रोक दिया गया था
• 2021 की परिस्थिति:-
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक टेंडर पास किया है जिसके तहत हीरा खनन का कार्य आदित्य बिरला ग्रुप को 50 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा लेकिन कंपनी को अपने प्रोजेक्ट के शुभारंभ से पूर्व ही 2.15 लाख हरे भरे वृक्षों को काटना होगा
जहां पहले बताया गया था कि यहां वन्यजीवों के होने की संभावना है पर अब विभाग की नई रिपोर्ट जो अनुराग कुमार डीएफओ तथा सीएफ ने निकाली जिसमें स्पष्ट वन्यजीवों का ना होना बताया है
• हमारी आवाज:-
इस पर बकस्वाहा के रहवासियों ने अपनी आवाज उठाई है तथा प्रदेश के लोग भी इस पर रोक के पक्ष में है फिलहाल दिल्ली की समाज सेविका नेहा सिंह इस आंदोलन को 9 अप्रैल 2021 को अपने वकील प्रीति सिंह और संलग्न पोखल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्द की है पर अभी इस पर सटीक कोई कार्य नहीं हुआ है
• क्या? ऐसा करना सही है:-
हम पहले ही अपनी धरती को कहीं हद तक नष्ट कर चुके हैं जिसके फलस्वरूप मानव जीवन खतरे में चल रहा है वृक्षों की पहले ही हम बड़े रूप में हानि बहन कर चुके हैं अगर अब वृक्षों को इतने बड़े रूप में काटा जाएगा तो हम अनुमान भी नहीं लगा सकते कि आगे क्या होने वाला है पहले ही बक्सवाहा उच्च तापमान वाला गांव है हर वर्ष यहां पानी की बहुत कमी रहती है ऐसे में वृक्षों का कटना अधिक क्षति पहुंचा सकता है वर्तमान के आपातकालीन समय में जहां ऑक्सीजन की कमी है इसके लिए सरकार वृक्ष को लगाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है वहीं पर हरे-भरे वृक्षों को काटना कहां की समझदारी है
"सासं ही नहीं रहेंगे तो श्रृंगार का क्या करोगे
हम और आप यह समझ ले तो जंगल को बचा सकेंगे".
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