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बुधवार, 2 जून 2021

गांव में जानवर या जंगल में गांव :- हिन्दू रावसाब सिंह लोधी


(लेखक :- हिन्दू रावसाब सिंह लोधी)

वर्तमान समय में इंसान ने विकास की अंधी दौड़ मैं ना तो प्रकृति को छोड़ा और ना ही किसी जानवर को आज के समय में आधुनिकीकरण की इस दौड़ में चाहे जंगल हो या जंगलों में रहने वाले जानवर सभी को सर्वाहारी का शिकार होना पड़ा है         प्राचीन समय में हमारी आर्यव्रत में 60% से भी ज्यादा भूमि पर प्रकृति और जंगली जीवों का राज था ।और जंगली प्राणी जंगलों में खुशहाल जिंदगी बिता रहे थे। फिर धीरे-धीरे समय बीतता गया और आज 60% से भी ज्यादा भाग पर आज हम इंसानों का कब्जा है।

               जहां पहले जंगली प्राणी रहा करते थे वहां आज हमारे खेत या पर्यटक स्थल हैं और हम इंसानों का कब्जा हो गया है

            यदि आज जंगली प्राणी हमारे गांव या शहर में आ जाएं तो बोलते हैं। हम इंसान बोलते हैं कि ऐ  गांव में जानवर कहां घुसे चले आ रहे हैं और जंगली प्राणियों का बचना मुश्किल हो जाता है।

       यदि आज जानवरों की भाषा इंसान समझते होते तो जानवर भी यही कहते हैं। कि हम तुम्हारे गांव में नहीं आए हैं बल्कि ठीक से देखो तुम्हारा गांव हमारी जंगल में आ गया है।

इसी प्रकार बक्सवाहा के जंगलों को  पेड़ों और खूबसूरत घाटियों से मत देखो यह कई जंगली प्राणियों का घर है।

जब-जब हम इन जंगली प्राणियों को सताएं गे तब तब हमारे सामने कोरोना  जैसी अनंत घटनाएं घटित होगी।


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