ब्यूरो छतरपुर। कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह ने ग्रामीण विकास विभाग की कार्यों की समीक्षा बैठक में कहा है कि क्षेत्र के विकास के लिए एकीकृत (इंटीग्रेटेेड) कार्य योजना तैयार करते हुए भू-जल स्थल बढ़ाने से जुडे़ं कार्यों की गतिविधि वर्षा के पूर्व पूरी करें, और विकास मूलक कार्यों की गति बढ़ाएं तथा ग्रामीण क्षेत्रों मे अधिकाधिक दौरे करें। मनरेगा योजना मे गौरिहार, राजनगर और बिजावर के सहायक यंत्री द्वारा संतोषप्रद कार्य नहीं करने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। जो उपयंत्री कार्य नही करें हैं उन्हें हटाने का प्रस्ताव दे। सहायक यंत्री और उपयंत्री मुख्यालय पर ही रहें। जो नियत मुख्यालय पर नहीं पाए जाते है तो उनकी वेतन की कटौती करें। नही समझने पर उन्हें हटाने का प्रस्ताव भी दे। बैठक में सीईओ श्री ए.बी. सिंह सहित जनपद पंचायतों के सीईओ भी उपस्थित थे।कलेक्टर श्री सिंह ने कहा है कि अटल भू-जल मिशन योेजना में स्टापडेम निर्माण से जुड़े कार्य डॉ. परम के अनुमोदन से ही प्रस्तावित करें। उन्होेंने कहा कि प्रभार क्षेत्रों में पौध रोपण के लिए फलदार और ऑक्सीजन प्रदाय करने वाले पौधे रोपित कराएं और पौधे की सुरक्षा का इंतजाम करें।
जिले में पशुपालन एवं मुर्गी पालन को विस्तारित रूप देने के लिए हितग्राहियों को उन्नत नस्ल के पशु-मुर्गा-मुर्गी दिये जाए। और समिति गठन कराएं।
गौ-शाला मेें 12 महीने रहने वाले पशुओं की व्यवस्था बनाएं। जिससे गौ-शाला लगातार संचालित होती रहेें। आवारा घूमनें वाले पशुओं को गौ-शाला में रखा जाए। पशु आहार के लिए चारा उत्पादन की गतिविधि मुख्य रूप में शामिल करें। गौ-शाला में जो पशु रखे जायेेंगे उन के लिए गौ-कास्ट मशीन भी रखें, पशु के गोबर से बर्मी कम्पोस्ट खाद के साथ-साथ गोबर गैस बनाने पर विचार करें।
• किसानों की समृद्धि के लिए कपिल धारा के कुएं बनाएं।
कलेक्टर ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के लिए कपिल धारा के कुएं बनाएं। लोकल जियोग्राफी टोपोसीट के आधार पर कुआं निर्माण का स्थान चिन्हित करें और कुएं निमार्ण के लिए 2.50 लाख की सीमा निर्धारित नही की जाए, बल्कि सम्पूर्ण लागत स्वीकृत करें। जिन क्षेत्रों में नहर नहीं है और सिंचाई के साधन भी नहीं है वहां प्राथमिकता से कुएं के निर्माण कार्य में तेजी लाएं। कुएं निर्माण में बंधाई कार्य भी शामिल किए जाएं इसके मान से राशि स्वीकृत करें। प्रत्येक ग्राम में 20-20 भू-नाडेप स्वीकृत करें। इसके लिए सार्वजनिक एवं निजी घूरे बनाएं जाए और बनने वाली खाद का वितरण समान रूप में करें।मनरेगा योजना में निर्मल नीर और सिंचाई स्त्रोत विकसित करें। भू-स्थल के साथ-साथ पर्यावरण सुधारें। इस कार्य में विशेषज्ञ की मदद लें। 15वें वित्त आयोग की राशि से जिले के शासकीय भवनों को पक्की सड़को से जोड़े।