//अक्षय जैन//
बड़मलहरा(छतरपुर)। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर के माधव सभागार में कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई के उपलक्ष्य में शहीदों का स्मरण और भारतीय सेना के शौर्य को कवियों ने अपनी-अपनी वीर रस से प्लावित काव्य रचनाओं के माध्यम से सम्मान प्रकट किया।
प्रातःकाल आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य ने नगर के आमंत्रित सैनिकों का सम्मान किया। विदित हैं कि 3 मई सन् 1999 को कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने क्षेंत्र की बर्फीलों चोटियों पर कब्जा कर लिया था। जिसे भारतीय सैनिकों ने 60 दिन के लगातार संघर्ष के बाद खदेड़ कर मुक्त कराया था। इस युद्ध में भारत के 527 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। सेना ने 26 जुलाई 19 99 को यह अभियान सफल बनाया। तभी से कारगिल विजय दिवस26जुलाई को सैनिकों की शहादत को शौर्य को नमन् करने के लिए मनाया जाता है। करगिल विजय की स्मृति को ताजा करने के लिए संध्या समय कवि गोष्ठी आयोजित हुई। सरस्वती वंदना के उपरांत कवि मनोज कुमार तिवारी ने अपने गीत से वातावरण में उत्साह भर दिया-"भारत माता की सेवा में जो अपना लहू बहाता है,वीर वही कहलाता है। महावीर वही कहलाता हैं। कवि सत्यपाल यादव ने गीत पेश किया"हमने उन पर गीत लिखे जो गीतों में न समा पाए।कवि मनोज पाण्डेय ने गीत गुनगुनाया- "बहना तिलक करें भैया को, भैया मोरे प्यारे; ई धरती के लाल हो बांँकुरे वीर।कवियत्रि मालती जैन ने पंक्तियां पेश की "शहादत देंने वाले वीरों को मेंरा बारम्बार नमन् हैं।कवि भरत लाल अग्रवाल'अनुज'ने कविता प्रस्तुत की"जिस भारत की मिट्टी मैं हमने जन्म लिया हैं, उसका हरदम् मान बढ़ाया है डॉ डी.के.सोनी ने ख्याल विधा मैं काव्य रचना प्रस्तुत की;ऐसी उत्तम जौन पदारथ फिर नहीं बारम्बार मिले।कार्यक्रम में डॉ. देवदत्त द्विवेदी'सरस',पूरन सिंह बुन्देला,नवीन जैन,आचार्य राजेंद्र गर्ग ने भी काव्य पाठ किया।इस अवसर प्रभारी प्राचार्य रविन्द्र तिवारी,दिनेश पाठक जमुना शर्मा,मयंक मिश्रा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मनोज कुमार तिवारी ने किया। आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय के प्राचार्य तथा विभाग के समन्वयक हरीराम तिवारी ने कहां कविताएं हम सभी को प्रेरणा देती हैं।हमें जीवन को सवारने मैं संबल प्रदान करती हैं। मैं कविता रचता नहीं हूंँ परंतु बहुत अच्छा श्रोता हूंँ।