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सोमवार, 21 मार्च 2022

भू-विज्ञान के लिए देश के सर्वोच्च संस्थान जीएसआई द्वारा विद्यार्थियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण...विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर और एसआरटीएम यूनिवर्सिटी नान्देड़ के 25 विद्यार्थी प्रशिक्षण में शामिल।


फेकल्टी से इन्टरेक्शन ही है, विद्यार्थियों में समझ विकसित करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका:- डी. के. थवैत

      

//मदन साहू//

रायपुर(छत्तीसगढ़)। देश में भूविज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत सर्वोच्च संस्थान भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण जीएसआई के भू-वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करने के लिए स्थापित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रशिक्षण संस्थान फील्ड ट्रेनिंग सेंटर रायपुर ने भूविज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने भावी पीढ़ी को सुदृढ़ बनाने के लिए सराहनीय कदम उठाते हुए, विद्यार्थियों को प्रख्यात अनुभवी भू-वैज्ञानिकों से सीखने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है। संस्थान की इस सराहनीय पहल के तहत् विद्यार्थियों को 19 मार्च से 24 मार्च,2022 तक छः दिवसीय अल्पकालीन प्रशिक्षण दी जा रही है।इस ट्रेनिंग में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर से 8 विद्यार्थी आयुषी पटेल, दीक्षित उके, गौतमी हारोडे,मदन साहू, मौलिक पान्डेय, नवनीत भालेकर,संजय कुमार पटेल,श्वेता और स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी नांदेड महाराष्ट्र से 17 विद्यार्थी सौरभ माधवराव गायवाडे, चाणक्य विश्वनाथ तरोणे,प्रतिक प्रभाकरराव निगडकर,हर्षल मोहन हरमकर,रोडगे अनिकेत ज्ञानबा,मोहन लक्ष्मण मोरे, चौधरी सचिन विलासराव,डी संगमा चियाक चुबा जुलियस,डव्ह‌‌ळे करण सखाराम,प्रितम अशोक दुधकुवर,आकाश शिवलाल कापगते,लहाने शुभम ज्ञानदेव,लोहारे अमित सुरेश,राहुल जानकीराम मुंडे, प्रेरणा प्रविण सागावकर, ऋषिकेश बालाजी सकरगे,शेंडे रितिक रामकृष्ण सहित कुल 22 विद्यार्थी शामिल हुए हैं।

            प्रशिक्षण के पहले दिन श्री डी. के. थवैत, डायरेक्टर, जीएसआईटीआई,एफटीसी रायपुर द्वारा विद्यार्थियों के लिए स्वागत उद्बोधन के साथ ही 6 दिवसीय अल्पकालीन प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। वहीं उन्होंने विद्यार्थियों से हमेशा फेकल्टी से इंटरेक्शन कर समझ विकसित करने और आवश्यक रूप से ब्रन्टन कम्पास को बारीकी के साथ सीखने की अपील भी की। तत्पश्चात उनके द्वारा छत्तीसगढ़ का भूविज्ञान और खनिज संपदा विषय पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ भूवैज्ञानिक आशीष वाधवानी ने वोट ऑफ थैंक्स देते हुए, प्रशिक्षण के लिए विद्यार्थियों के नामांकन के लिए विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर और  एसआरटीएम यूनिवर्सिटी के विभागाध्यक्षों का आभार प्रकट किया।कार्यक्रम का संचालन श्री रामेश बाबू जालेम, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक के द्वारा किया गया। वहीं वरिष्ठ भूवैज्ञानिक आशीष वाधवानी द्वारा मैपिंग की बारिकियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।

       प्रशिक्षण के दूसरे दिन विद्यार्थियों को डायरेक्टर श्री डी. के. थवैत के निर्देशन व वरिष्ठ भूवैज्ञानिक रामेश बाबू जालेम व आशीष वाधवानी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सुपरग्रुप के रायपुर ग्रुप के चांदी फाॅर्मेशन में स्टोमेटोलिटिक लाइमस्टोन, रायपुर ग्रुप के ही चरमुरिया फाॅर्मेशन में ग्रे लाइमस्टोन ,संस्तरित क्रम अनुसार चरमुरिया फाॅर्मेशन के नीचे स्थित चन्द्रपुर ग्रुप के लोहरडिह फाॅर्मेशन में फेरोजिनस सेन्डस्टोन, डोंगरगढ़ ग्रेनाइट, बया नीस इत्यादि का भूवैज्ञानिक अध्ययन करवाकर उनसे संबंधित कई भू-वैज्ञानिक तथ्यों की भी जानकारी दी।

        इस भू-वैज्ञानिक प्रशिक्षण के तीसरे दिन 21 मार्च को विद्यार्थियों को रामपुर से 1 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पूर्व में स्थित बाया नीस, सोनाखान ग्रुप के बाघमारा फाॅर्मेशन में मेटा बेसाल्ट,सोनायुक्त ग्रेनाइटिक    अंतर्वेधन,डोलेराइट,मेटा रायोलाइट और अर्जुनी फाॅर्मेशन के बेसल भाग में स्थित जोंक कांग्लोमेरेट का भूवैज्ञानिक अध्ययन कराया गया। वहीं विद्यार्थी अभी तक अर्जित पुस्तकीय ज्ञान को फील्ड पर  देखकर ख़ुशी से भर गए और उन्होंने कहा कि वह सब भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा प्रदान किए गए इस महत्वपूर्ण सुअवसर के लिए जीएसआई के प्रति आभारी हैं।