भारतीय संविधान के 73वें एवं 74 वें संविधान संशोधन के माध्यम से स्थानीय स्वशासन को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का अहम दर्जा दिया जाना एवं उसके अंतर्गत समाहित अनुच्छेद 243(घ) तथा 243(न) में वर्णित आरक्षण का ही नतीजा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं में राजनीतिक सहभागिता की लहर जागृत हुई है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान में वर्णित अनुच्छेद 243 (ट) के अंतर्गत ग्राम पंचायतों एवं अनुच्छेद 243 (यक) के अंतर्गत नगर पालिका के चुनाव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा वर्तमान में मध्यप्रदेश की ग्राम पंचायतों एवं निकाय क्षेत्रों में निष्पक्ष रूप से कराए जा रहे हैं।
अतः इन ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में राजनीतिक सहभागिता की अनूठी बानगी देखने को मिली है. आंकड़े बताते हैं कि इस बार के पंचायत चुनाव में महिला उम्मीदवारों ने पुरुष उम्मीदवारों से ज्यादा संख्या में नामांकन पत्र दाखिल किए हैं. महिला एवं पुरुष उम्मीदवारों के बीच का यह अंतर थोड़ा नहीं बल्कि 39179 का है। इतनी ज्यादा संख्या में नॉमिनेशन का मुख्य कारण यह है कि महिलाओं ने अपनी आरक्षित सीटों से तो उम्मीदवारी की ही है, साथ ही अन्य सीटों से भी उम्मीदवारी की हुई है।
• महिला-पुरूष उम्मीदवारों का आंकड़ा।
गत दिवस मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त डाटा के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के कुल 875 पद के लिए 4227 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं तो पुरुष उम्मीदवारों की संख्या 3544 है. ठीक इसी प्रकार जनपद पंचायत सदस्य के कुल 6711 पदों के निर्वाचन के लिए महिला उम्मीदवारों की संख्या 21542 है तथा पुरुष उम्मीदवारों की संख्या 16598 है। एवं सरपंच के कुल 22921 पदों के लिए महिला उम्मीदवारों की संख्या 77201 है व पुरुष उम्मीदवारों की संख्या 67808 है। तथा पंच के कुल 363726 पदों के लिए महिला उम्मीदवार 212518 साथ ही पुरुष उम्मीदवार 188359 चुनावी रण में उतरे हुए हैं अतः इस प्रकार पंचायत चुनाव में कुल महिला उम्मीदवारों की संख्या लगभग 03 लाख है।
• संचालित की लाइब्रेरी और अब चुनावी मैदान में।
छतरपुर जिले की ग्राम पंचायत पनौठा से सरपंच पद की उम्मीद कु. सदफ खान बताती है कि मैंने अपने गांव के मुद्दे शुरू से ही नोटिस किये है लेकिन आम- जन होने के कारण मैं कुछ अधिक नही कर पा रही थी. अभी पूर्व समय में मैंने गांव में एक लाइब्रेरी भी शुरू की हुई है जिससे गांव के बच्चे पढ़ सकें और आगें बढ़ सकें। क्योंकि शिक्षा एक ऐसा मुद्दा है जिससे पूरे गांव का विकास अटका हुआ है, इसलिए यह ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें समझने की जरूरत है और इसके लिए जन जागरूकता लाने के लिए युवाओं को आगे आने की आवश्यकता है।
• महिलाओं ने अपने आप को पाया योग्य।
इस सब के लिए महिला अध्धयन केंद्र की पूर्व विभागाध्यक्ष आशा शुक्ला कहती हैं कि महिलाओं ने अपने आप को योग्य पाया है. ये महिलाएं भविष्य की वो नेता बनेंगी जिनका कोई सरपंच पति या भाई नही होगा। अतः ये अपने दमखम पर विश्वास करने वाली महिलाएं है।
• राह में अभी भी मुश्किलें।
पंचायत चुनाव में इतनी अधिक संख्या में महिलाओं द्वारा उम्मीदवारी करना निश्चित ही प्रसंशनीय है, किंतु राह अभी भी आसान नहीं है क्योंकि ऐसा देखा जाता है कि अनेकों ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच अथवा अन्य प्रतिनिधि बनने के बाद उनका सारा कामकाज पति, भाई अथवा संबंधी देखते हैं।
अतः असली राजनैतिक सहभागिता तब ही प्रासंगिक होगी जब महिलाएं राजनीति में आकर अपने कार्यों को स्वयं ही करेंगी।
संदर्भ:-
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग
द सूत्र