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रविवार, 9 मार्च 2025

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: चुनौतियों से लड़ने की ज़िद ने दी जीवन में नई दिशा:- सांसद लता

//राजेश पाराशर//

नेटवर्क सागर। महिलाओं से हमारा अभिप्राय है मातृसत्ता। मातृशक्ति को उसी  प्रकार किसी राष्ट्र की सुदृढ़ता की नींव कहा जा सकता है जिस प्रकार वह मानव जीवन और जगत की नींव है। घर संसार और परिवार की नींव। जब हम राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान जैसे प्रश्न पर विचार करते हैं, तो इसका वास्तविक अर्थ होता है राजनीति में उनका योगदान। सांस्कृतिक तत्वों के निर्माण और विकास में उनका योगदान। राष्ट्र के स्वरूप का मूल कारक तो महिलाएं हुआ करती हैं। आज शिवाजी की माता जीजाबाई, रानी पद्मावती, पन्नाधाय, माता तुलसी, अरुणा आसफ अली, विजयलक्ष्मी पंडित, भारत कोकिला सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी, राजकुमारी अमृत कौर, लता मंगेशकर, उड़नपरी पीटी उषा, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला जैसी कई मातृशक्ति है जिन्होंने अपने जीवन में चुनौतियों से डटकर मुकाबला इतिहास के पन्नों में गवाही के रूप में कभी न मिटने वाले सशक्त हस्ताक्षर किए हैं।मेरा मानना है और यही संदेश है की नई आज के युग में नारी अबला नहीं, सबला है।

यह संदेश अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बुंदेलखंड अंचल के सागर जिले की जुझारू और संघर्ष से सफलता की कहानी लिखने वाली सांसद श्रीमती डॉक्टर लता वानखेड़े की है। श्रीमती वानखेडे ने अपने जीवन में कभी चुनौतियों से हार नहीं मानी। लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई पंच से अपने राजनीतिक जीवन का सफर तय कर वह तीन बार सरपंच रही और आज भारत के मंदिर में प्रतिनिधित्व कर रही है। इतना ही नहीं आज वे इंटरनेशनल पार्लियामेंट यूनियन की भारत से एकमात्र महिला सदस्य है।

किस्मत में जनता की सेवा करना लिखा था : लता

विवाह के बाद उन्होंने कभी शायद सोच ही नहीं था कि वह राजनीति के इतने बड़े ओहदे पर पहुंचेंगी। लेकिन पति नंदकिशोर (गुड्डू ) वानखेड़े और उस समय टीम में शामिल महिलाओं ने प्रेरित किया तो आज वह सांसद बनकर जनता की सेवा करने में प्राण प्रण से जुटी है।

करीब 35 साल उन्होंने राजनीति में एक तपस्या के रूप में चुनौतियों से डटकर मुकाबला कर यह मुकाम हासिल किया है। वह महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। आज देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा की राजनीति में सत्ता और संगठन में शुरू से ही तालमेल कर आगे बढ़ाने वाली लता वानखेड़े ने महिलाओं की दिशा और दशा सुधारने में कई कार्य किए हैं । मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कई ऐसे उदाहरण पेश किए हैं जो एक नजीर है। श्रीमती वानखेड़े ने कई टूटे परिवारों में अपने संदेश का मंत्र देकर ऐसी कहानी लिखी है। जो परिवार आज उन्हें दुआएं दे रहे हैं। घरेलू हिंसा, दहेज एक्ट और पति-पत्नी में अनवन जैसे तलाक की नौबत आने वाले मामलों को उन्होंने नारी को  शक्ति के रूप में पेश कर बिखरते परिवारों को टूटने से बचाया है । राजनीति सच्चे मायनो में उनके लिए समाजसेवा है। नाम न छापने की शर्त पर सागर जिले ही नहीं दमोह और बालाघाट की कई महिलाओं ने बताया जीवन मैं ऐसे कई मोड़ आए की मैं थक चुकी थी। मैं मौत को गले लगाना चाह रही थी लेकिन हमारी दीदी यानी लता वानखेड़े ने हौसला और संबल ऐसा दिया कि आज हम खुशी और सुखी है। लता वानखेड़े का कहना है राष्ट्र निर्माण में महिला या पुरुष के योगदान का अर्थ महज राजनीतिक योगदान नहीं है। राष्ट्रीय ऊर्जा का निर्माण एवं विकास करने वाले अनेक लोग हैं। साहित्य के क्षेत्र में रहकर भी राजनीतिक क्षेत्र में श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी महिलाओं ने जो नाम अर्जित किया है वह आज अविस्मरणी है।

महिला वर्ग किसी भी राष्ट्र का वास्तविक बल हुआ करती है। आवश्यकता है उसे जागृत करने की । उसके अधिकारों की रक्षा करने की। उसे उचित संबल प्रदान करने की। उसके प्रति उदार मन बनाकर ही यह सब किया जा सकता है। आज की नारी साहित्य, संगीत, ललित कला, संस्कृति और विविध कार्यों में पुरुषों से कहीं बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। नारी शक्ति ने आज धरती से आसमान तक की उड़ान तय की है। मेरा भी यही मानना है नारी शक्ति घर की चारदिवारी से बाहर निकले और अपने अधिकारों की रक्षा करें। आज खुशी है कि महिलाएं कई क्षेत्रों में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रही है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक दिन का नहीं है। बल्कि यह दिन हमें यह सीख देता है कि नारी अबला नहीं  सबला है।पंच सरपंच के अलावा सैकड़ो पदों पर कार्य करते हुए लता वानखेड़े ने महिला हितों में कई उदाहरण ऐसे पेश किए हैं जो आज मिसाल नहीं बेमिसाल है। 

सांसद रहते हुए सागर को सुखद और संपन्न देखना चाहती हूं

आज डॉ श्रीमती लता वानखेड़े सागर की सांसद है। उनका कहना है जनता के स्नेह और आशीर्वाद ने जो हमें यह जिम्मेदारी दी है । अब हमारा प्रयास है कि सागर स्वच्छ और सुंदर बने इसके लिए मैं और शासन प्रशासन हमेशा तैयार है। मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि जनता ने मुझे सांसद के लिए चुना है मैं उनके इस स्नेह विश्वास पर खड़ी उतर सकूं। मैं सांसद रहते हुए सागर को सुखद और संपन्न देखना चाहती हूं । 

आज इस खास दिवस पर नारी शक्ति के लिए संदेश

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति के लिए यही संदेश देना चाहती हूं कि नारी शक्ति समाज में एक ऐसी मिसाल पेश करें जिसके लिए वह परिचय की मोहताज न रहे । आज बात चाहे केंद्र सरकार की हो या प्रदेश की सरकार भी उन्हें हर तरह से सहयोग और बल देने में अपनी घोषणाओं पर अमल कर रही है; बस जरूरत है उठो... जागो... आगे बढ़ो और संघर्ष से सफलता की कहानी लिखो। 

(लेखक सांसद के पीआरओ है)