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मंगलवार, 22 जनवरी 2019

नैनागिरी सिद्धशिला पर ज्ञानमती माताजी को हुई अलौकिक अनुभूति।


भारत गौरव आर्यका की बुंदेलखंड यात्रा के दौरान उमड़ रहा भारी जनसैलाब.....


 संवाददाता बिंद्रावन विश्वकर्मा की रिपोर्ट....              

घुवारा/बकस्वाहा(छतरपुर)। परम पूज्य ज्ञानमति माताजी ने सिद्धक्षेत्र नैनागिर मैं विशाल धर्मसभा 20/1/2019 को संबोधित किया साथ ही नैनागिर पर्वत के दर्शन किए समाजसेवी पवनघुवारा ने बताया कि जहां भगवान पारसनाथ का समोशरण आया था,परमपूज्य ज्ञानमति माता जी ने धर्म सभा को संबोधित करने के उपरांत नैनागिर में बीच नदी किनारे जंगल में शाम 5 बजे जाकर सिद्ध शिला दर्शन किए।
 उस सिद्ध शिला पर जब माताजी पहुंची तो उन्होंने एक अलग ही अनुभूति प्राप्त की और जिस समय में दर्शन कर रही थी।
 सिद्ध शिला पर अपनी 85 वर्ष की उम्र मे सिद्ध शिला साधना के चरणों का दर्शन लाभ लिया दर्शन करके उन्होंने जो अनुभूति पाई वह दृश्य उपस्थित जनों ने देखा और मानो साक्षात ऐसा लग रहा था की देव उपस्थित हो और माता जी बिन बोले ही आंख बंद करके अपनी साधना मई तपस्या में तल्लीन हो गई।
 वह क्षण शत-शत नैनागिर के साथ बुंदेलखंड वासियों को भी गौरान्वित बीच जो अनुभव हुआ और प्रेरणादायक रहा की जिस आयु के पड़ाव पर है उस में लोग एक कदम भी बाहर नहीं निकालते लेकिन ज्ञानमती माताजी बुंदेलखंड के घनघोर जंगलों के बीच अपनी यात्रा को एवं बुंदेलखंड की प्राकृतिक वैभव को ऐतिहासिक धरोहरों को देख कर प्रसन्न हो रही है और संदेश दे रही हैं कि समाज इन धरोहरों को संरक्षित करें तोड़कर मरोड़ कर नया रूप देने का कोई प्रयास ना करें प्रकृति की देन पूर्वजों की देन समाज को एक प्रेरणा देती है।
 यह संदेश माताजी ने दिया समाज में एक समरसता का भाव जागृत किया पवन घुवारा ने बताया की पुज्यनीय माता वर्तमान में  बुन्देलखण्ड तीर्थ यात्रा पर हैं जो दिगम्बर जैन समाज की सर्वप्राचीन दीक्षित साध्वी एवं सर्वोच्च गुरुमाता के रूप में मान्य भारतगौरव गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी एवं उनके साथ प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चन्दनामती माताजी सहित सप्त-आर्यिकाओं एवं पीठाधीश श्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने अतिप्राचीन दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिरी में उस सिद्धशिला स्थल का भी दर्शन किया जहाँ जैन मान्यतानुसार प्राचीन काल से जैन मुनियों ने तपस्या करके मोक्ष प्राप्त किया है।
 ऐसे स्थान के पवित्र परमाणु हमारी आत्मा को शुद्धता देते हैं। यहाँ आकर भक्तों को २ मिनट ही सही लेकिन ध्यान करके उन मुनियों का स्मरण करना चाहिए ।