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मंगलवार, 22 जनवरी 2019

 भगवान अवतार की कथा सुनकर मन-मुग्ध हो उठे श्रृद्धालु।


संवाददाता विन्द्रवन विश्वकर्मा की रिपोर्ट....

घुवारा(छतरपुर)। नगर की बडी माता मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के पाचवे दिन कथाबाचक पं. महेश शास्त्री जी ने वामन भगवान के अवतार का बर्णन किया ।जिसमे सभी श्रृद्धालु मन मुग्ध हो उढे ।पं. महेश शास्त्री जी ने बताया का राजा बलि बड़ा पराक्रमी राजा था। उसने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया।
 उसकी शक्ति के घबराकर सभी देवता भगवान वामन के पास पहुंचे तब भगवान विष्णु ने अदिति और कश्यप के यहां जन्म लिया। एक समय वामन रूप में विराजमान भगवान विष्णु राजा बलि के यहां पहुंचे उस समय राजा बलि यज्ञ कर रहे थे।

बलि से उन्होंने कहा राजा मुझे दान दीजिए। बलि ने कहा मांग लीजिए। वामन ने कहा मुझे तीन पग धरती चाहिए। दैत्यगुरु भगवान की महिमा जान गए। उन्होंने बलि को दान का संकल्प लेने से मना कर दिया। लेकिन बलि ने कहा गुरुजी यह क्या बात कर रहे हैं आप। यदि ये भगवान हैं तो भी मैं इन्हें खाली हाथ नहीं जाने दे सकता। भगवान वामन ने अपने विराट स्वरूप से एक पग में बलि का राज्य नाप लिया, एक पैर से स्वर्ग का राज नाप लिया। बलि के पास कुछ भी नहीं बचा। तब भगवान ने कहा तीसरा पग कहां रखूं। बलि ने कहा मेरे मस्तक पर रख दीजिए। जैसे ही भगवान ने उसके ऊपर पग धरा राजा बलि पाताल में चले गए। भगवान ने बलि को पाताल का राजा बना दिया। सतयुग में दैत्यराज प्रहलाद के पोत्र बलि ने स्वर्ग में अधिकार कर लिया था। सभी देवता इस विपत्ति से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु के पास गए। तब भगवान विष्णु ने देवताओं से कहा की में स्वयं देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लेकर तुम्हे स्वर्ग का राज्य दिलाऊंगा। कुछ समय पश्चात भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को भगवान विष्णु ने वामन अवतार के रूप में जन्म लिया। इधर दैत्यराज बलि ने अपने गुरु शुक्रचार्य और मुनियों के साथ दीर्घकाल तक चलने वाले यज्ञ का आयोजन किया। बलि के इस महायज्ञ में ब्रह्मचारी वामन जी भी गए। वे अपनी मुस्कान से सब लोगो के मन मोह लेते थे। दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने अपने तपो बल से वामन के रूप में अवतरित भगवान विष्णु को पहचान लिया।