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बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

किसानों की कर्ज माफी में हुए घोटालों की जांच में भी देखा जा रहा है घोटाला।

किसानों की कर्ज माफी में हुए घोटालों की जांच में भी देखा जा रहा है घोटाला।



छतरपुर।  प्रदेश के मुखिया कमलनाथ के बनने के बाद प्रदेशवासियों को यह उम्मीद जगी थी। कि सरकार बदलने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। और शासन और प्रशासन की चक्की के बीच भ्रष्टाचार में पिस रहे किसानों को राहत मिलेगी। परंतु सत्ता बदली सरकार बदली। लेकिन प्रशासन के नुमाइंदों का रवैया जस का तस बना हुआ है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने कर्ज माफी में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर कर धरातल पर लाने का पूरा प्रयास किया। और ग्राम पंचायतों में सूची चस्पा करवा कर किसानों को अपने कर्ज की वास्तविकता का पता लग गया जिससे भ्रष्टाचारियों में खलबली मच गई। जिन किसानों ने कभी सोसायटी का दरवाजा भी नहीं देखा उनके नाम पर लाखों रूपये  के  कर्ज सूची में दिख रहे थे। छतरपुर जिले में बकस्वाहा क्षेत्र भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में अब्बल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की दूरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी है। कर्जमाफी में हुए घोटाले की भ्रष्टाचार की जांच के लिए बकस्वाहा विकासखंड में तीन-तीन अधिकारियों के जांच दल गठित कर दिए गए। लेकिन जांच टीमों ने समिति प्रबंधकों से लेजर बुक के आधार पर जांच शुरू की। समिति प्रबंधकों के लेजर में किसानों की वही कर्ज दर्ज किए गए है। जो किसानों के द्वारा लिया गया है एस इसका  मिलान सेवा सहकारी मर्यादित बैंक से किया जाना था। जहां से लेनदेन का आदान-प्रदान हुआ है। और फर्जी एंट्री करके किसानों के नाम पर राशि आहरण की गई है। इसके अलावा भी किसानों से फर्जीवाड़ा के संबंध में गुलाबी फार्म भरे जाने थे। लेकिन समिति प्रबंधकों ने ग्राम पंचायतों से सचिव और नोडल अधिकारियों मिलकर सफेद फॉर्म भरा दिए गए। जिससे भ्रष्टाचार की जांच से बच सकें अब जब किसानों को सच्चाई का पता लगा तो वे सभी किसान गुलाबी फार्म भरने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। जब वह सचिवों के पास जाते हैं तो उनका कहना है कि अब यह पोर्टल पर इंट्री हो चुका है। और अब फॉर्म नहीं बदल सकता जबकि कुछ किसानों ने गुलाबी फार्म भरा उनके पास उनके मोबाइल पर हरे फॉर्म के मैसेज आ रहे हैं। इस प्रकार किसानों की समस्याएं जस की तस बनी हुई है प्रदेश के मुखिया की मंशा पर प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा लीपापोती के जा रही है। देखने वाली रोचक बात यही रहेगी जिले के कलेक्टर प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा को जमीनी स्तर पर अमली जामा पहना सकते है। या नहीं। हालांकि अभी तक जिले में हो रही कार्रवाई से जिले वासी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

टीम बुंदेलखंड प्रजेंट न्यूज़।