खुशियों की दस्तां,किसानों की उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी।
चार चेक डेम संरचनाओं का निर्माण हो जाने से एक फसलीय रकबा हुआ अब द्विफसली।
//खिलान पटैल//
ब्यूरो दमोह। माइक्रो-वाटरशेड ग्राम-खैजरा बल्जू एवं पिपरिया घनश्याम में परियोजना से जल संग्रहण गतिविधि के तहत चार चेक डेम संरचनाओं का निर्माण हो जाने से आसपास के ट्यूब वेल एवं कुंओं का जल स्तर तो बढ़ा ही है,इसके अलावा एक फसलीय रकवा अब द्वि-फसलीय रकवे में परिवर्तित हो गया है। जिससे किसानों की कृषि भूमि में उत्पादन क्षमता बढ़ी है,ग्राम में ही कृषि कार्य उपलब्ध होने से मजदूरी करने ग्राम के बाहर जाने की जरूरत भी समाप्त होती नजर आने लगी है, पेयजल के स्तर में भी सुधार हुआ है।इन संरचनाओं की कुल लागत राशि 29.13 लाख एवं भण्डारण क्षमता 25044 घन मीटर है, जिससे 26 हैक्टेयर भूमि सिंचित कर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ अर्जित किया जा सकता है।
दमोह से 55 किलोमीटर और बटियागढ़ से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित माइक्रो वाटरशेड-खैजरा बल्जू एवं पिपरिया घनश्याम राजस्व ग्राम फतेहपुर के अंतर्गत आता है इन ग्रामों की ग्राम पंचायत पौड़ी फतेहपुर है। इस ग्राम में अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं अन्य जाति वर्ग के लोग रहते हैं,जो अपने परम्परागत मजदूरी एवं आसपास उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर है।
माइक्रो वाटरशेड बकरऊ नदी कैचमेन्ट क्षेत्र में आता है। माइक्रो वाटरशेड का कुछ स्वीकृत क्षेत्रफल 550 हैक्टेयर है,जो एकीकृत जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम आई.डब्ल्यू.एम.पी.-17 दमोह जिले के विकासखण्ड-बटियागढ़ को उपचार के लिए चयनित किया गया है। परियोजना क्षेत्र के चयन का आधार वर्षा आधारित कृषि भूमि में कम उत्पादन क्षमता, अविकसित क्षेत्र, पेयजल की कमी व पलायन को मानकर किया गया है।
उन्नत किस्म के गेंहू के बीजों का परियोजना के माध्यम से किसानों को वितरण करके भी उत्पादकता में वृद्धि अर्जित की गई है। कृषक अब नये-नये कृषि यंत्र नई-नई वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग कर स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत होकर अपने भौतिक सुख सुविधाओं पर भी पैसा खर्च कर रहे है।
जनसहभागिता के लिए ग्राम-खैजरा बल्जू एवं पिपरिया घनश्याम में परियोजना द्वारा उपयोगकर्ता दल का गठन किया गया है, सामान्यत: परियोजना अवधि के दौरान माइक्रो वाटरशेड ग्राम में निर्मित की गई संरचनाओं एवं गतिविधियों का रख-रखाव एवं लम्बे समय तक उपयोग करने के लिए किया जाता रहेगा, जो संरचनाओं के अपने आधिपत्य में होने वाले लाभों को प्राप्त कर सकते है। इन उपयोगकर्ता दलों द्वारा अपने स्तर पर कुछ नियम बनाये है, जिनसे उन्हें सम्पत्तियों के संदर्भ में स्वामित्व एवं सामुदायिक भावना जागृत होती रहेगी और भविष्य में संरचना का रखरखाव सुनिश्चित किया जायेगा।
सम्पादित कार्यो के परिणाम स्वरूप आर्थिक लाभ एवं सामाजिक प्रभाव का विवरण- संरचना निर्माण से उपयोगकर्ता दल के सदस्यों को आर्थिक रूप से मजबूत होकर स्वालम्बन की ओर कदम बढ़ा रहे है। गतिविधि या कामकाज चुनने की स्वतंत्रता और समृद्धि से शक्ति, इस परियोजना का मूलमंत्र है। उपयोगकर्ता दल के सदस्यों की आर्थिक रूप से मजबूत होने का प्रत्यक्ष लोगों में भी परिलक्षित होता है।
सम्पादित कार्य की अभिनवता, कार्य से प्रेरणा का विवरण, कार्य को सहभागिता से एवं जनसहयोग से करने से कार्य गुणवत्ता पूर्ण एवं लाभकारी होता है एवं उसके सुखद अनुभव प्राप्त होते है और सम्पादित कार्य से सीख का विवरण संरचना निर्माण स्थल का उचित चयन एवं जन सहभागिता से किये गये कार्यो का परिणाम मूलक लाभ प्राप्त हुआ है।
