इस युक्ति से मिलेगा चना,गोभी,टमाटर,मटर की फसलों को 30 गुना लाभ।
नेटवर्क टीकमगढ़। फीरोमेन ट्रेप सिस्टम के प्रयोग से किसानों को चने की फसल में काफी लाभ हो रहा है। यह सिस्टम चने के साथ ही पत्ता गोभी, फूल गोभी, मटर, टमाटर की फसलों में भी कारगर साबित हो रहा है। इस सिस्टम के प्रयोग से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को 25 से 30 प्रतिशत तक नियंत्रित करने में सफलता मिली है। इससे किसानों को तो आर्थिक लाभ हो ही रहा है, इस सिस्टम के उपयोग से उत्पन्न होने वाली फसलें भी स्वास्थ्यवर्धक होती हैं जो लोगों के लिये फायदेमंद हैं।
फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले इन कीटों का प्रजनन रोकने के लिये कृषि महाविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों ने फीरोमेन ट्रेप सिस्टम का उपयोग शुरू किया है।
इस सिस्टम के माध्यम से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को मादा कीटों की मादक सुंगध में फंसाया जाता है।
वैज्ञानिकों को चने की फसल में नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर 25 से 30 प्रतिशत नियंत्रित करने में सफलता मिली है।
किसानों के लिये यह सिस्टम बहुत सस्ता और कारगार है।
फसलों में लगने वाली कीटव्याधी किसानों के लिये बड़ी समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिये किसानों को कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करना पड़ता है, यह दवाएं जहां किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ाती हैं, वहीं इन दवाओं के प्रयोग से फसलें भी लोगों के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो जाती हैं। कीट व्याधी की इस समस्या को देखते हुये कुषि महाविद्यालये के कीट वैज्ञानिकों ने एक नया प्रयोग किया है। कीट वैज्ञानिक डॉ आरएस मरावी एवं डॉ योग रंजन ने बताया कि इन कीटो को नियंत्रित करने एवं प्रजनन रोकने के लिये फीरोमेन ट्रेप सिस्टम से 25 से 30 प्रतिशत तक फायदा मिला है।
ऐसा करता है काम।
फीरोमेन ट्रेप सिस्टम के विषय में मुख्य डॉ मरावी ने बताया कि इस सिस्टम में मादा कीट से प्राप्त रासायनिक हारमोन का प्रयोग किया जाता है। यह हारमोन वयस्क नर कीट को प्रजनन के लिये आकर्षित करता है।
इस रसायन की गंध को सूंघ कर कीट इसकी ओर आकर्षित होते हैं और ट्रेप में फंस जाते हैं। उनका कहना है कि यह कीट इसी मौसम में प्रजनन करते हैं, प्रजनन के बाद यह खेतों में अपने अंडे देते हैं और फिर इनमें से इल्लियां निकलती हैं, जो फसलो को नुकसान पहुंचाती हैं। यह कीट चने के साथ ही पत्ता गोभी, फूल गोभी, मटर, टमाटर को भी नुकसान पहुंचाता है।