कलेक्टर बोले समाज में लिंग-भेद की भावना हो दूर,नई दिशा के साथ नई सोच लाने का है प्रयास।
● उत्कृष्ट सफलता हासिल करने पर बालिकाओं को बालिका दिवस पर प्रोत्साहन राशि से किया गया सम्मानित।
● स्थानीय मानस भवन में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कार्यक्रम संपन्न।
//नरेंद्र अहिरवार//
नेटवर्क दमोह। हमें कभी भी लड़के और लड़की में भेद नहीं करना है, हमारे समाज के कुछ ऐसे क्षेत्र है जहाँ हमें काम करने की जरूरत हैं,लिंग भेद की भावना को समाप्त करना हमारा लक्ष्य है। हमें नई सोच को समाज मे लागू करने का प्रयास करना चाहिए जिससे हमारा और हमारे देश का समग्र विकास हो सके, मुझे पूरा विश्वास है, आप सब इस क्षेत्र मे अच्छा काम करेंगे और हमारे जिले को नई उचाईयों तक ले जायेंगें। इस आशय की बात आज कलेक्टर तरूण राठी ने स्थानीय मानस भवन मे आयोजित राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर कही।श्री राठी ने कहा भेद भाव की मानसिकता को दूर करने का माध्यम स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास का मैदानी अमला हैं, इस प्रशिक्षण के बाद सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के प्रति और सजग हो जायें। उन्होने कहा अपने पदीय कर्तव्य के प्रति निष्ठा और पूरी ईमानदारी से कार्य करें। उन्होने कहा आगामी दिनो मे ब्लाक लेवल पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा की बैठक होना सुनिश्चित की जायेगी। कलेक्टर तरूण राठी ने महिला बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा जिले की न्यूनतम 10 आंगनबाडी केन्द्रों जिनमें कार्यों की पेन्डेनशी हैं, का चयन कर सूची तैयार की जायें, उनके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि हम पहले चरण मे ही गर्भवती महिला का चिन्हांकन कर उसे आने वाले क्रमों मे एएनसी चेकअप कर उसे योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाये। जहाँ पर गर्भवती महिलाएं बताने से कतराती है, वहाँ पर महिलाओं के बीच में चौपालों का आयोजन किया जायेगा, जिससे गर्भवती महिलाएं एएनसी चेकअप के लिए प्रेरित हो सकेगी।
उन्होने कहा नए दम्पति तक आशा एवं आंगनबाडी कार्यकर्ता का लक्ष्य होना चाहिए कही भी घर मे प्रसव ना हो इस बात का ध्यान देना जरूरी हैं, संस्थागत प्रसव ही होना चाहिए। श्री राठी ने कहा शासन की विभिन्न योजनाओ के तहत गर्भवती महिलाओ को सुविधा मुहैया करानी चाहिए, जिससे ऐसी स्थिति निर्मित ना हो कि बच्चे कुपोषित पैदा हो सकें।
इस अवसर पर महिला बाल विकास अधिकारी ने कहा 24 जनवरी को किशोरी बालिका दिवस का आयोजन किया जाता है, जिसका ये मतलब नही होता कि हम एक दिन ही बालिकाओ के बारे मे सोचे, हमें लगातार बालिकाओं के विकास में प्रयास करना चाहिए। उन्होने कहा देश की बालिकाएं किसी भी क्षेत्र मे पीछे नही है, वे पुरूषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम करती हैं। उन्होने कहा बलिकाओं का जिस अनुपात मे देश की जनसंख्या मे योगदान है, उस हिसाब से उनका सर्वांगिक विकास नही हो पाता है, इस सबंध मे हमे प्रयास करना चाहिए।
उन्होने कहा बलिकाओ को प्रत्येक क्षेत्र मे कार्य करने के लिए प्रोत्साहित हेतु लगातार प्रयास किए जाते है, जिससे उनका मनोबल बढ़े। उन्होने कहा माता-पिता और गुरू ये ऐसी हस्तियां है, जो कभी भी अपने बच्चों का बुरा नही चाहते, हमे इनके ऋण को हमेशा उतारने का प्रयास करना चाहिए
इस अवसर पर सैडमेड के समन्वयक पीएन तिवारी ने महिलाओं के सम्मान पर गीत प्रस्तुत किया, सुधा कनौजे बेटी बचाओ पर कविता प्रस्तुत की। महिला बाल विकास विभाग ने एक बेटी को कक्षा 12 वीं में उत्कृष्ट सफलता हासिल करने पर 20 हजार रूपये की राशि और प्रमाण पत्र, जिले में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली 10 वीं और 12 कक्षा की 10-10 बालिकाओं को 5-5 हजार रूपये की राशि के साथ प्रमाण पत्र वितरित किये गये। स्वरोजगार स्थापित करने हेतु उद्यमिता विकास केन्द्र द्वारा 100 बालिकाओं एवं महिलाओं को विभिन्न प्रशिक्षण उपरांत प्रमाण पत्र वितरित किये। कार्यक्रम का संचालन विपिन चौबे ने किया। इस मौके पर महिला सशक्तिकरणय अधिकारी संजीव मिश्रा, डॉ तुलसा ठाकुर, आरबी सिंह सहित बड़ी संख्या में बालिकाओं एवं महिलाएं उपस्थिति थी।

