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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

शुद्ध के लिए युद्ध के सार्थक प्रयास।

शुद्ध के लिए युद्ध के सार्थक प्रयास।


● पहली जुम्मेदारी मे तय पैकेज निगरानी मंत्रीमंडल समिति पर EOW की प्राथमिकी FIR होना चाहिए : भूमिपुत्र पवन घुवारा


ब्यूरो नेटवर्क।  म.प्र.शासन कि केबिनेट मंत्री मा.विजय लक्ष्मी साधौ जी को टीकमगढ़ प्रवास के दोरान बुन्देलखण्ड पैकेज पर वषों से सघर्षरत पवनघुवारा ने अनुरोध पत्र देकर निवेदन किया है कि  EOWद्धारा प्रथमदृष्टया यह भष्टाचार के मामले पर संज्ञानात्मक कार्य हो रही है जब  CTEV जाचं मे गम्भीरतम आरोप भष्टाचारियो के रिपोर्ट मे आ गये है तो पहली FIR र्दज वर्ष 2010 जो शासक के मंत्री मंण्डल निगरानी समिति बनाई गई थी वही प्रथमदृष्टया आरोपी हो क्योंकि विभागों की कार्यवाही मे भी दो सौ से अधिक अधिकारीयो को आरोप पत्र पूर्व ही दिये जा चुके है अतः सघर्षरत पवनघुवारा ने मा.कमलनाथ जी को गंभीरतम जानकारी सहित पत्र भेज कर सरकार का ध्यान आपेक्षित किया है कि उक्त मामला देश के चारा घोटाले से भी बहुत बडा है क्योंकि चारा घोटाले मे तो केवल चारा  था यहाँ तो स्कूटर के नम्बरों पर पांच टन पत्थर , स्टाम्डेमो के डेमे गायब ,पानी पीने कि 1296नल जल योजना, बकरीया साथ मे भूसा, इतनी ही नहीं स्थालों के काम जहाँ कुछ भी नही हुआ हो काम ,किसानों के डीजल पंम्प के साथ क्या क्या नही हुआ भष्टाचार मे अतः पवनघुवारा ने निवेदन किया है कि पहले शासको पर हो कार्यवाही साथ  ही चिन्हित हो भष्टाचार से सने जुमेदार प्रथम पंति के प्रशासनिक जन ताकि *शुद्ध के लिए युद्ध के सार्थक प्रयास हो।
EOW ने दर्ज की प्राथमिकी बुंदेलखंड विकास पैकेजअनियमितता मामले पर विगत वषों से र्सघषरत पवनघुवारा ने बिन्दु बार बताया कि
■विजलेंस CTEVतकनीकी विभाग जाचं मे भष्टाचार हुआ तय हुआ हो
■विभागों के प्रमुख सचिवालयो से आरोपियों को आरोपित किया हो ,
■हाईकोर्ट से जनहितयाचिका पर फैसला हुआ हो
■प्रजातंत्र के चोथे स्तंम्भ द्धारा वास्तविकता को उजागर समय समय पर किया हो ,
■ नीतिआयोग ने कार्य योजना को तय कर बिना उपयोगता प्रणाम पत्र वा भष्टाचार जाचं के बीच हजारों करोड़ कि राशि जारी करना हो ,
■प्रधानमंत्री जी द्धारा मंचों से म.प्र.मे बुन्देलखण्ड पैकेज के कार्यो की प्रंशसा सहित तारीफ हुई हो
■मात्र 3800  सौ करोड़ कि राशि के कार्यो कि देख रेख हेतु प्रदेश के (मुख्य सचिव व्यवस्थागत सचिव हो)
■एवं मुख्यमंत्री (शिवराज जी) कार्ययोजना अध्यक्ष  व मंत्रीमण्डल के सदस्यों समूह कि निगरानी मे प्रतिपादन हुआ हो
■म.प्र.विधानसभा से लेकर लोकसभा मे भी समय समय पर र्चचा सहित विचार होता रहा हो

■  म.प्र. की कैबिनेट द्वारा दिनांक 12 सितम्बर 2017 को लिये गये फैसले में बुन्देलखण्ड पैकेज मे भ्रष्टाचार करने वालों पर (नियम) सेवानिवृत्त के चार साल बाद भी कार्यवाही होगी ’केबिनेट द्वारा लिये गये फैसले को लेकिन लागू नहीं किया गया ।
■जहाँ कार्यो के कार्य ओर  कार्य प्रणाली जमीनीस्तर पर वस्तुस्थिति को  जन-जन जानता के साथ देखा  हो
 ★【बुन्देलखण्ड पैकज से किऐ गये कार्या की संख्या  जो योजना आयोग कि साईट पर दशाऐगये है 31/12/2018】
■【बुंदेलखंड पैकेज के रूप में 'मध्य प्रदेश को 3,860 करोड़ रुपये स्वकृति किए थे】

■【3226करोड़ 21लाख की राशि म.प्र.को अवन्टित हो चुकी है】
■【कुल 2801करोड 02लाख  खर्च 】
■म. प्र. के6 जिलों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई राशि जिस से सागर, दमोह, पन्ना ,टीकमगढ़ ,दतिया, और छतरपुर, में मूलभूत सुविधाओं के नो विभागों से कार्यो होना था।
■बदनसीबी \दमोह की पंचमनगर परियोजना के मझगुवां हंसराज जलाशय में 4 लाख के बिल को सुधार कर 23 लाख किया गया पत्रकार संतोष भारती द्धारा जमा कलेक्टर दमोह सतर्कता पत्र क्र.ओ.एसडी 1978/दि. 19.8.2010 जहाँ 18 से अधिक जिम्मेदार मंत्री से लेकर सभी के नाम एफआईआर भी दर्ज है ।
■निलंबन बहाली कि आंख मिचैली का भ्रष्टाचार निवाडी के पास करियापाठा स्टापडेम जहां बिना अनुमति बांध की ऊंचाई लगभग 1.50 मीटर कम की गई पर कार्यरत सब इन्जीनियर बी. सी.कोरी को पहले निलंबन दिया गया जब उक्त अधिकारी ने निलंबन के जवाब मे यह उल्लेख कर दिया कि साहब जिन्होंने निलम्बित किया वही तो उक्त भ्रष्टाचार में है तो तुरंत ही बहाली का आदेश दे दिया ।
■ बीला बांध पोषक नहर परियोजना में भष्टाचार पर विधायक राजेश कुमार वर्मा का पत्र ।
■ सिंहपुर वैराज परियोजना में बिना अनुमति के 1करोड़ 15 लाख का भुगतान के सन्दर्भ में एवं बरियारपुर परियोजना मं भष्टाचार पर मा.पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह जी का पत्र ।
■ दमोह में  निर्मित स्टापडेम में हुये भष्टाचार पर पत्रकार संतोष भारती जी का पत्र ।
■ भीतरीमुटमुरू बांध पर पूर्व विधायक फुन्दर चौधरी पन्ना का पत्र।
■ बुन्देलखण्ड पैकेज में जिन्हें महत्वपूर्ण दायित्व दिया था उनके ऊपर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर मे दायर था पूर्व में केस जिनके ऊपर पांच पांच हजार के हजारों बिल वाउचर्स उपरोक्त तथ्यों की पुष्टि राजन श्रीवास्तव तत्कालीन प्रमुख अभियंता बोधी जल संसाधन विभाग भोपाल के जांच प्रतिवेदन क्र.734 दि 08.06.2010 से होती है।
■ ऐसे अधिकारी कार्यपालन यंत्री भी लगाये गये जिनकी गोपनीय शासकीय डायरी में यह अंकित है कि यह वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवेहलना करते ! बिना स्वीकृति के कार्य कराये ! तकनीकी ज्ञान का अभाव हैै। पत्र क्र.एफ 22-2014/पी-1 इकतीस, फिर बांध निर्माण करना, यह सभी शेष प्रपत्र  लम्बित रखी गई है, *मुख्य तकनीकी परीक्षक द्धारा जांच नहीं की गई है*

【पशुपालन/डेयरी /उद्यानिकी\मछली】

-151.27 करोड़राशि ! से छःजिलो मे किऐ गये कायों की संख्या
बकरी पालन ईकाई संख्या 5296
मुर्रा सांड ईकाई संख्या 2403
डेयरियां डबल्ब संख्या 561●मछली विभाग- 5.53 करोड़
मत्स्य बीज वितरण मछुआरों को प्रशिक्षण कार्य
●पशुपालन सेवाएं सागर, टीकमगढ़, दतिया, पन्ना, छतरपुर, एवं दमोह पूर्ण रूप से सभी उपसंचालक उत्तरदायी हैं
योजना अनुसार राशि को सीधे हितग्राहियों के खाते में जमा किया जाना थी परन्तु छतरपुर जिले में अनुदान राशि रूपये 83,71,665/- उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं छतरपुर द्वारा हितग्राहियों के खाते में जमा न करते हुये पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों के निजी खातों में जमा की जो कि एक गंभीर आर्थिक अनियमितता है ।

【जल संसाधन विभाग】

 - 1340 करोड़राशि!से छःजिलो मे किऐ गये कायों की संख्या
लघु सिंचाई स्कीम (49)के तहत संख्या 16464 कार्य
स्कीम (3) मे नहर नवीनीकरण तालबों की मरम्मत कार्य संख्या 22918
स्कीम(78)के तहत सुद्दढीकरण एवं पुनरुद्धार कार्य संख्या 22700
स्कीम (97)के तहत नईलघु कार्य संख्या 142084
जल संसाधन विभाग के कामों में बड़ी तकनीकी खामियां मिली हैं।
बुंदेलखण्ड पैकेज के तहत बनाए गए ज्यादातर बांध और तालाब में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है जिसके चलते ये लंबे समय नहीं तक टिक पाएंगे । इसके अलावा सीटीई का ये भी मानना है कि इन बांधों और तालाबों की क्षमता का दस फीसदी भी उपयोग नहीं हो पा रहा है
●नहरों की लाइनिंग कार्य की स्ट्रेंग्थ की जांच चलित प्रयोग शाला द्वारा की जाने पर सी.सी.लाइनिंग की स्ट्रेंग्थ निर्धारित मापदण्ड से कम पायी गयी लाइनिंग कार्य में दरारें भी पाई गई एवं अधिकांश भाग में ज्वाइंट फिलर से नहीं भरे
●बांध अण्डर सेक्शन है एवं अपस्ट्रीम एवं डाउन स्ट्रीम के स्लोप डिजाइन प्रोपाईल के अनुसार निर्मित नही किये गये है मिट्टी के कार्य का काम्पेक्शन निर्धारित माप दण्डानुसार नही किया गया । पिचिंग माप दण्डानुसार न होने से कार्य अमानत स्तर का पाया गया । योजना पर किया गया व्यय अनुपयोगी हो गया

【ग्रामीण विकास विभाग 】

-209.73करोड़ राशि से छःजिलो मे किऐ गये कायों की संख्या!
स्टांप डेम संख्या -353
पंपसेट उपकरण संख्या-37274
कुआँ खोदे संख्या-42666
खेत तालाब संख्या-2277
कुआँ रिचार्जगं संख्या-2252
●प्रत्येक स्टापडेम हेतु पृथक-पृथक अनुबंध सम्पादित किया जाना संभागीय कार्यालनय की त्रुटिपूर्ण कार्यवाही है। प्रथम ठेकेदार द्वारा छोड़े गये शेष कार्य पर निविदा आमंत्रित ना किये जाने से व इस कारण शेष कार्य की अतिरिक्त लागत की राशि संबंधित ठेकेदार से वसूल न होने पर संभागीय कार्यालय एवं निविदा स्वीकृतकर्ता अधिकारी की गंभीर त्रुटि है। जिसका उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जाना आवश्यक है।
●कन्सल्टेन्ट द्वारा बनाये गये डी.पी.आर. पर प्रदाय तकनीकी स्वीकृति के अनुसार अधिकांश कार्यस्थलों पर निर्माण कार्य नहीं किया जाना पाया गया। कार्य पूर्ण होने पर व्यय की गयी राशि व प्रशासकीय स्वीकृति/तकनीकी स्वीकृति की राशि में कॉफी अन्तर पाया गया

【वन विभाग】 

180.37 करोड़राशि ने किया पैकेज  से छःजिलो मे किऐ गये कायों की संख्या!वन तालाब एवं मिट्टी और नमी संरक्षण कार्य संख्या 89166
●जांच में 23 वाहन में से अधिकांश वाहन ऐसे है जो कि व्हाउचर में दर्शाय गये प्रकार से एकदम भिन्न है, जैसे कि व्हाउचर के अनुसार ट्रेक्टर एवं जे.सी.बी. दशायें गये हैं। लेकिन आर.टी.ओ.रजिस्टेशन के अनुसार मोटर सायकिल, स्कूटर, स्कूटी पैप आटो रिक्शॉ एवं इण्डिगो टैक्सी इत्यादि पाये गये हैं।
●क्रमांक 443 में तालाब निर्माण पर 102974 रू. फर्जी व्हाउचर द्वारा व्यय किया गया जबकि कार्य स्थल पर यह तालाब मौजूद नहीं हैं।
क्रमांक 445 में तालाब निर्माण के कार्य पर रू. 736782/- का फर्जी भुगतान होना पाया गया जबकि इस तालाब का निर्माण ही नहीं किया गया एवं यह स्थल पर उपलब्ध ही नहीं था।
●कुछ व्हाउचर ऐसे व्यक्तियों के नाम पर बताये गये है। जिनकी पूर्व में ही मृत्यू हो चुकी हैं।

【पीएचई विभाग】

 - 299.51करोड़राशिसे छःजिलो मे किऐ गये कायों की संख्या!
नलजल योजना संख्या 1287
शोचालय सुविधा टाका टंकी संख्या 1422
नलजल पम्प हाउस संख्या 1205
●समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के अनुसार क्रियान्वित 1269 नलजल योजनाओं में से विभिन्न कारणों से 997 योजनाएं जांच के दौरान बन्द पाई गई पाइप लाइन तकनीकि मापदंडों के अनुरूप न डाली जाने हेतु संबंधित उपयंत्री, सहायक यंत्री एवं कार्यपालन यंत्री जवाबदार हैं। कार्य विभाग नियमावली की अपेंडिक्स 1.24;द्ध (परिशिष्ट-63) के अनुसार अधीक्षण यंत्री द्वारा उनके कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने से वे भी जवाबदार हैं ।
●पीएचई के ईएनसी जीएस डामौर ने राज्य सरकार को 100 पेज की रिपोट भेज दी है। जिसमें 78 करोड़ रुपए की बर्बादी के लिए सीधे तौर पर अफसरों को जिम्मेदार बताया है।

【कृषि विभाग】 

614.36 करोड़ राशिसे छःजिलो मे किऐ गये कायों की संख्या!
हाट बाजार वेयरहाउसिंग स्टे्रक्चर  -214 कार्य● वेयर हाउस, मंड़ी निर्माण, उद्यानिकी, डीजल पम्प, वितरण, आदि कार्य कराये जाने थे।
●माइको दूरीगेशन योजना में प्रदाय किये गये स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सेट की कुल संख्या 1059 मे विरूद्ध दो चरणों (छतरपुरजिले)में किये गये सत्यापन में 339 हितग्रहियों 32 प्रतिशत कृषकों का मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया जिसमें कुल 101 कृषकों को कम सामान प्राप्त होना तथा 40 कृषकों को बिल्कुल भी सामान प्राप्त नहीं होना पाया गया । इस प्रकार शिकायत में दिये तत्य सहीं होना परिलक्षित होता हैं।
●कार्यों के डी.पी.आर. अपूर्ण एवं त्रुटिपूर्ण बनाए गए हैं। जिसके लिये कन्सल्टेंट द्वारा अनुबंधानुसार कार्य नहीं करना परिलक्षित होता है।
*जल जंगल जमीन और मानव जिंदगी का घोटाला अहम सवाल है कि केवल अधिकारियों द्वारा 2800 करोड़ का भष्टाचार क्या किया गया* !
!! *पहली जुम्मेदारी तय पैकेज निगरानी मंत्रीमंडल समिति की ही होना चाहिए* !!
 =======(क्या सजा ही न्याय  है)======
 !!सजगताऐ ही न्यायालय है यही मानवता है!!
 _________{ आखिर जुम्मेदार }__________
       !!सघर्षरतभूमिपुत्र (पवनघुवारा)!!