● सभी अधिकारियों से मदद की लगाई गुहार, निराशा ही लगी हाथ।
//मनीष सम्राट//
घुवारा(छतरपुर)। तहसील घुवारा के ग्राम बमनौरा में एक पिता अपने बच्चे के इलाज के लिए बड़े से बड़ा दरबाजा खटखटाने के बाद भी अभी से ही उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है।जब से बेटे के मस्तिष्क में टि्वमर की जांच का पता चलते ही पूरी तरह से टूट गया ।
आज एक माह लगातार प्रयास के बाद भी अभी से ही कोई सहायता नहीं मिल रही है।
ग्राम बमनौरा के कमलेश बंशल के बेटे को इस गंभीर बीमारी का इलाज कराने में असमर्थ हैं क्योंकि कमलेश मज़दूर कर के परिवार का पालन-पोषण करता था चूंकि बेटे के मस्तिष्क की बीमारी की जानकारी मिलते ही पूरी तरह से कमजोर पड़ गया।
कमलेश बंशल के द्वारा बताया गया कि मेने सभी अधिकारियों के पास जाकर प्रार्थना की लेकिन केवल आश्वसन ही मिला लेकिन अभी तक कोई सहायता नहीं मिली।
आज के समय में गरीबों का मसीहा कोई नहीं होता अधिकारी से लेकर राजनेता तक केवल आश्वसन ही मिला है बेटे की बिगड़ती बीमारी को देखते हुए रो रो कर बुरा हाल हो लगा है परिवार के लोगो का बुरा हाल है ।
अब सोचने बाली बात यह है कि जो असहाय लोगों के लिए राहत राशि प्रदान की जाती है बह केवल अमीरों के लिए है या गरीबों का भी अधिकार है क्योंकि आज के समय में गरीबों से तो लोग बात करना ही नहीं चाहते तभी तो दरबाजे से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
