//शानू अली//
भगवां(छतरपुर)। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में काम करनें वाले श्रमिकों को मजदूरी नहीं मिल पा रही। रोजगार सहायक फर्जी तरीके से दूसरे मजदूरों के खातों में राशि डालकर खुर्द-बुर्द कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में मजदूरी भुगतान में हेरफेर करनें वाले एक रोजगार सहायक को सीइओ ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्के महान देनें के उद्देश्य से देश में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरु की है। योजना अंतर्गत शहरी व ग्रामीण परिवारों को वर्ष 2022 तक आवास दिऐ जानें हैं। स्थानीय जनपद पंचायत की 79 ग्राम पंचायतों में वर्ष 2017-18 से 2020-21 तक 88 सौ 19 आवास निर्माण प्रस्तावित है इनमें 67 सौ 19 निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं जबकि, 21 सौ अवास प्रगतिरत हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में बि.खं.अंतर्गत व्यापक धांधली सामनें आ रही है। एक ओर लेनदेन कर प्राथमिकता सूची से छेडखानी की गई है वहीं ग्रामीण अंचल में आवास योजना के हितग्राहियों को मजदूरी का भुगतान नहीं दिया जा रहा। बताया जाता है कि, निर्माण ऐजेंसी के जिम्मेदारों द्वारा हितग्राही परिवार के आलावा अन्य मजदूरों के जॉबकार्ड लगाकर फर्जी तरीके से मजदूरी का पैसा आहरण किया जा रहा है। हाल में ग्राम पंचायत सूरजपुराकला से एक मामला आया है। यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही को मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं किया गया बल्कि, यहाँ के तत्कालीन रोजगार सहायक ओमप्रकाश साहू ने मस्टर रोल पर अन्य 2 मजदूरों के नाम दिखाकर उनकें खाते में 1720 रुपये का भुगतान किया है। आवास हितग्राही ने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई है। सीइओ अजय सिंह ने मामलें को संज्ञान में लेकर शुक्रवार को सूरजपुराकला के तत्कालीन रोजगार सहायक ओमप्रकाश साहू जिसकी वर्तमान पदस्थापना ग्राम पंचायत बन्न में है को कारण बताओ नोटिस थमाया है। सीइओ ने पत्र में शिकायत का हवाला 2 दिन में जबाब मांगा है जबाब, संतोषप्रद न मिलनें पर सेवा समाप्ति का उल्लेख किया गया है।
● मजदूर राशि का गोलमाल
जनपद क्षेत्र में और भी ऐसे हितग्राही हैं जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना में मजदूरी का भुगतान नहीं दिया गया जबकि, सरपंच व रोजगार सहायकों की सांठगांठ से अन्य श्रमिकों के जॉबकार्ड लगाकर मजदूरी के पैसों का गबन किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत शहरी क्षेत्र के हितग्राहियों को 2.5 लाख रुपये व ग्रामीण क्षेत्र के हितग्राही को 1.5 लाख रुपये किस्तवार खाते में दिए जानें की योजना है। विभाग की मानें तो ग्रामीण अंचल में योजना अंतर्गत पहली किस्त 25 हजार रुपये व 40-40 हजार रुपये की दूसरी तीसरी किस्त व 15 हजार रुपये चौथी किस्त में दिए जाते हैं तथा 192 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 90 दिनों की मजदूरी दिए जाने का प्रावधान है और शौचालय विहीन परिवार को 12 हजार रुपये शौचालय निर्माण के लिए देने की योजना है। निर्माण ऐजेंसी आवास योजना में दूसरे मजदूरों के नाम मस्टररोल में चढाकर उनकें खाते में मजदूर राशि का गोलमाल किया जा रहा है।
● कुंवरपुराकला में भी है गोलमाल।
बि.खं. की ग्राम पंचायत कुंवरपुराकला में भी प्रधानमंत्री आवास योजना हितग्राहियों के मजदूरी राशि का गोलमाल किया गया है। गांव में रहने वाले भिम्मा पिता मोनलाल आदिवासी बताता है कि, वह प्रधानमंत्री आवास योजना का हितग्राही और जॉबकार्डधारी है। निर्माण ऐजेसी ने आवास योजना अंतर्गत चार किस्तों में उसे 1लाख 20 हजार रुपये ही दिए है जबकि, मजदूरी का पैसा नहीं मिला। इसी प्रकार हितग्राही कैलाश लोधी बताता है कि, उसके खाते में मजदूरी का पूरा पैसा नहीं आया। बताया जाता है कि, सरपंच ने अपने परिजनों के नाम मस्टर रोल में दर्शाकर प्रधानमंत्री आवास योजना की मजदूर राशि निकाली है।
● बोल्डर चैक डैम तोड़ कर बना दिये गेवियन स्ट्रेक्चर।
जल स्तर को बढनें के उद्देश्य से सरकार ने नालों पर गेवियन स्ट्रेक्चर बनाने की योजना तैयार की है। तकनीकी विभाग की मानें तो गेवियन संरचना पत्थर और तार से बना एक तरह का बांध है यह संरचना नालों में बहते पानी की गति को कम करता है और नदी में गाद आना कम करता है। इस प्रक्रिया से पानी को जमीन में उतारकर भूजल रिचार्ज की गति में बढाता है। योजना अंतर्गत मनरेगा से बि.खं. की अनेक ग्राम पंचायतों में गेवियन स्ट्रेक्चर निर्माण कार्य स्वीकृत हुए है। पंचायत कर्मियो ने संरचना निर्माण को आडे हाँथों लिया है और इनके निर्माण में मापदंड का ख्याल नहीं रखा। निर्माण ऐजेंसी ग्राम पंचायत को यह संरचना लाभ का धंधा सिद्ध हो रही है। जांच टीम निर्माण स्थल पर जाकर इनकी गुणबत्ता और तकनीकी मापदंडों की सही सही जांच करें तो निर्माण कार्य में एक बडा घोटाला उजागर हो सकता है। बताया जाता है कि, बीती पंचवर्षीय व चालू पंचवर्षीय में जल स्तर बढाने के उद्देश्य से मनरेगा मद से बोल्डर चेकडेम का निर्माण भी कराया गया है। निर्माण ऐजेसी बोल्डर चेकडेम तोडकर या उन्हीं पत्थरों को गेवियन स्ट्रेक्चर का रूप देकर सरकार को ठग रहे है। बताते है कि, ग्राम पंचायत कुंवरपुराकलां में सिलारों नाला 10 नग, खैरी नाला 8 नग, अमरनाला 10 नग, कुलरयाऊ नाला 10 नग, कारीहार की नरैया व गडरयरा नाला, मौनतेल नाला पर एक एक बोल्डर चेकडेम निर्माण हुआ है। निर्माण कार्य पर मनरेगा योजना से लाखों रुपये व्यय किए गये। चालू वर्ष में मनरेगा मद से 7.26 लाख रुपये गेवियन स्ट्रेक्चर पर खर्च होना प्रस्तावित है। ग्रामीण बताते है कि, कारीहार की नरैया पर बोलडर चेकडेम तोडकर उन पत्थरों का उपयोग गेवियन संरचना निर्माण में किया जा रहा है। यह मामला अकेले ग्राम पंचायत कुवंरपुराकला का ही नहीं बल्कि अन्य जगह भी इसी प्रकार यह कार्य हो रहे हैं।
● सूदूर सडक व कंक्रीट सडक निर्माण में भी धांधली।
ग्राम पंचायत कुंवरपुराकला में वर्ष 2017 में 13.51 लाख रुपये से सूदूर सडक स्वीकृत हुई है। इसमें 7 लाख 52 हजार 640 रुपये मजदूरी और 5 लाख 96 हजार 254 रुपये मटेरियल पर व्यय होना है। स्वीकृति के 3 वर्ष गुजरने के बाद निर्माण कार्य प्रगतिरत बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि, प्रधानमंत्री सडक से बरियनखेरे की ओर जाने वाली सूदूर ग्राम संपर्क सडक में निर्माण ऐजेंसी ने नियमों की अनदेखी की हैजिसका लगभग 13 लाख रुपये ठिकाने लगा दिया है । पंचायत, अमलता की नरैया से मिट्टी उठाकर गुणबत्ताहीन सडक निर्माण की है। 21 दिसंबर 2017 से 29 मई 2018 छ: माह के अंतराल में 8 मस्टर रोल के माध्यम से निर्माण कार्य पर 752640 रुपये और मटेरियल खरीदी में भी राशि व्यय की गई है। बताते है कि, ट्रांसफार्मर से बब्लू यादव के घर तक 25 जून 2019 को 6.69 लाख रुपये लाख रुपये की लागत से पंचपनमेश्वर मद से सीमेंट कंक्रीट सडक स्वीकृत हुई है। निर्माण ऐजेंसी ने तकनीकी मापदंड की अनदेखी कर आधी अधूरी सडक बनाई है। निर्माण कार्य पर पंचायत ने 2 लाख रुपये से अधिक मजदूरी पर खर्च दिखाया और शेष रकम मटेरियल खरीदी में खर्च की गई है।
●. इनका कहना है कि....
“पेंशन, शौचालय व आवास हितग्राही अपने आवेदन मुझे दें मैं जांच के उपरांत कार्रवाई आगे बढाई जाएगी। सूदूर एवं सीमेंट कंक्रीट सडक मामले की सहायक यंत्री द्वारा जांच कराता हूँ।"
