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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

22 अप्रैल :- विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष

# मूक वेदना#

क्यों आंखें सबकी गीली हुई

क्यों ये हवा जहरीली हुई

क्यों घना अंधेरा छाया है

क्यों सब पर मौत का साया है |

 मां धरती हमसे रूठ गई,

अंदर ही अंदर टूट गई,

हमने नदियां दूषित की,

जंगल सारे काटे हैं,

हमने विषैली गैसें छोड़ी,

हम जानवरों को खाते हैं

अपनी इस प्यारी धरती को,

फिर से सुंदर बनाए हम,

मैया जो हमसे रूठ गई,

आओ उसे मनाएं हम |


रचनाकार :- रत्नेश शशि जैन, छतरपुर (मध्यप्रदेश)