//अक्षय जैन//
घुवारा(छतरपुर)। सम्पूर्ण जिले में जहाँ कोरोना टीकाकरण के लिये जिला प्रशासन के द्वारा टीकाकरण महोत्सव चलाया जा रहा है लेकिन हकीकत में तो ये उत्सव केवल नाम का उत्सव है महोत्सव में टीकाकरण केंद्रों पर अव्यवस्थाओं की भीड़ ज्यादा देखने को मिल रही है मामला बड़ामलहरा अनुविभाग के भगवा टीकाकरण केंद्र का है जहाँ शनिवार को भगवा हायर सेकेंडरी स्कूल में 18 + ओर 45 + का टीकाकरण सम्पन्न होना था जहाँ सेकड़ो की तादात में युवा , बुजुर्ग , महिलाएं आदि पहुचना शुरू हो गई थी लेकिन वैक्सीन की कमी के कारण केवल 88 लोगो को टीका लग पाया बाकी सेकड़ो की जनता फड़फड़ाती नजर आई यहां भीड़ इतनी बेकाबू हो गई कि लाइन में लगने के लिए लोगो की एक दूसरे से नोक झोंक तक देखने को मिली जिन कर्मचारियों को टीकाकरण केंद्र पर मोजूद रहने के आदेश है वो केंद्र से नदारत देखने को मिले केंद्र पर सरकारी अमले में केवल एक कंप्यूटर ऑपरेटर ओर एक स्टाप नर्स मोजूद थी जो टीकाकरण के कार्य को गति देने में लगे थे बाकी वहां न तो पुलिस विभाग के कर्मचारी न ही राजस्व के कर्मचारी , न ही ग्राम पंचायत के कर्मचारी कोई भी प्रशासनिक कर्मचारी मोजूद नही था यहाँ 12 बजे तक भीड़ इतनी बढ़ गई कि भीड़ के द्वारा कमरे के दरवाजे तक कि बंद करने की नोबत शुरू होने लगी लेकिन ऐसी दुर्घटना कुछ बुद्धिजीवियों ने नही घटने दी भीड़ में महिलाएं , बुजुर्ग , युवा एक दूसरे से इस प्रकार से चिपक के खड़े थे अगर पूरी भीड़ में एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज हो तो वो पूरी भीड़ को संक्रमित कर सकता है ओर न ही भीड़ में लोगो के मुह पर मास्क था न ही कही सामाजिक दूरी का पालन उद्देश्य केवल एक ही था कि वैक्सीन लगवानी है अब जैसे भी लगे भीड़ ज्यादा होने के बाद कुछ नगर के बुद्धिजीवी व्यक्तियो ने प्रशासनिक कर्मचारियों को दुरभाष के माध्यम से भी इस मंजर की जानकारी दी लेकिन मोके पर किसी कर्मचारी का आना नही हुआ कर्मचारी अपने कार्यालय में बैठकर आराम ही फरमाते रहे इस मंजर का चर्चा आज पूरे भगवा क्षेत्र के मुह मुह पर है कि जब वैक्सीन कम आ रही है तो टीकाकरण प्लान में लक्ष्य ज्यादा क्यो दिया जा रहा है और जब वैक्सीन कम है तो पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर टीकाकरण क्यो नही किया जा रहा है और अनावश्यक भीड़ से कोरोना तो फैलेगा ही लेकिन कर्मचारियों की गैर मौजूदगी के कारण आम जन के बीच में कोई नया विवाद भी खड़ा हो सकता है टीकाकरण केंद्र पर अगर व्यवस्थाओं का जायजा ठीक तरीके से लिया जाए तो अवस्थाएं कम अवस्थाएं ज्यादा मिलना तय बात मानी जा रही है जिस कमरे में टीकाकरण का कार्य सम्पन्न हो रहा है उस कमरे में दो दरवाजे है लेकिन एक ही दरवाजा खोला जाता है उसी दरवाजे में महिलाओं की लाइन लगती है उसी दरवाजे मैं पुरुष लाइन लगती है एक यह मुख्य कारण रहा है शनिवार को पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं का टीकाकरण कम हुआ है क्योंकि जब महिलाओं को जब केंद्र पर जरूरी व्यवस्थाएं नही मिलेगी केंद्र पर एक भी महिला प्रशासनिक कर्मचारी मोजूद नही होगी तो महिलाएं वहां जाने से कतराती नज़र आई भीड़ को देखकर ग्रामीणों में केवल एक ही चर्चा है टीकाकरण लगवाने के लिए अगर भीड़ में शामिल हुए तो निश्चित तौर पर कोरोना हो जाएगा अब गंभीर टीकाकरण केंद्र का इलाज प्रशासन रूपी डॉक्टर कर पायेगा या नही ये देखना दिलचस्प होगा।