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बुधवार, 2 मार्च 2022

बक्सवाहा। स्व सहायता समूह अंतर्गत महिलाओ की राशि से हुई धोखाधड़ी।

//आशीष चौरसिया//

बक्सवाहा(छतरपुर)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बक्सवाहा अंतर्गत जामुनझिरी गावं की जय भवानी स्व सहायता समूह की महिलाओ की राशि से धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ है।

          जिसमें जय भवानी स्व सहायता समूह की अध्यक्ष  सुशीला साहू का कहना है कि उनके समूह में 10 महिलाओं को एक लाख की राशि अंतरित होनी थी लेकिन समूह कि लिखा पढ़ी का काम करने वाले व्यक्ति भगवानदास अहिरवार ने समूह की राशि का बंदरबांट किया है।

        वहीं भगवानदास का कहना है कि बंदरबांट मैंने अकेले नहीं किया है इसमें से मोटी राशि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बक्सवाहा के विकासखंड प्रबंधक राहुल गुप्ता को भी दी गई है।

     तथा जय भवानी समूह की  सचिव सपनाअठया ल का कहना है कि उन्हें प्रति सदस्य 10 हजार की राशि मिलनी थी लेकिन सभी को 07- 08 हजार की राशि देते हुए कुल एक लाख में से 64000 की राशि दी गई है और बाकि 36000 की राशि का बंदरबांट कर लिया गया है।

         *अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार और भी अन्य सात समूह से लाखों की राशि बंदरबांट होने के है आरोप....*

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत और भी सात समूह ऐसे है जिसमे लाखो की राशि कर्मचारियों की मिली भगत से बंदरबांट हो चुकी है अब सवाल ये है कि ग्रामीण क्षेत्र से जुडी हुई महिलायें छोटा-मोटा काम करने के लिए समूह बनाकर लोन लेती है. लेकिन ऐसे अधिकारी विचौलियों के माध्यम से उनकी राशि को बंदरबांट कर ले जाते है और फिर उसी राशि को बसूलने के लिए महिलाओ पर प्रेशर बनाते है, ऐसे में जब समूह की राशि को महिलाओ तक पूरा नहीं पहुंचाया जाएगा तो आखिर वह पैसे कहाँ से अदा करेंगी।

             गौरतलब है कि पूर्व में भी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बक्सवाहा अंतर्गत  स्व. सहायता समूह से जुडी चाचई सेमरा ग्राम की कुछ महिलाओ ने पुलिस थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके स्व सहयता समूह से राशि का बंदरबांट हुआ है।

•  थाना प्रभारी बोले...

इस मामले मे बकस्वाहा प्रभारी नगर निरीक्षक धन सिह नलवाय का कहना है कि अभी हमारे पास इस प्रकार की कोई शिकायत नही आई है।

•  आजीविका मिशन अधिकारी बोले...   

इस मामले मे राहुल गुप्ता राष्ट्रीय आजीविका मिशन अधिकारी बक्सवाहा का कहना है सभी ग्रामों के समुह अपने साथ लिखा पढी करने के लिये एक बिचौलिए को रखती है।

 हमारे यहां से समूह के खाते मे राशि जाती है अध्यक्ष और सचिव के साईन होने के बाद ही राशि निकाली जाती है. अब समूह के लोग अपनी राशि निकाल कर किसी को दे दें तो हम लोग क्या कर सकते है।                 


पूरे मामले का असली सच ये है की आजीविका मिशन के अधिकारियों द्वारा हर गॉव या वीट मे एक एक दलाल फिक्स कर लिया जाता है वो दलाल अपने गॉव की दस निरक्षर महिलाओं को लोन दिलाने का झॉसा दे कर सारी कागजी कार्रवाई करवा लेता है और अध्यक्ष व सचिव को पता भी नही रहता की उन्होंने कितनी राशि पर साईन किये है और कितने पैसे उन्हे मिले है तथा बाद मे जब किस्त भरने का टाईम आता है तो वो लोग किस्त न भर कर अपने समूह को डिफाल्टर घोषित करा लेते है जिससे उन महिलाओं को शासन की आगे की योजनाओं का लाभ नही मिल पात। 

शासन कितनी भी योजनाये बना ले लेकिन जब उससे जुडे लोग ही उन्होंने सही तरीके से क्रियान्वित नही करवायेंगे तो आम व्यक्ति को आखिर लाभ कैसे मिलेगा?