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मंगलवार, 9 अगस्त 2022

घुवारा। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मनाया मुहर्रम का त्यौहार।

//विन्द्रावन विश्वकर्मा//

 घुवारा(छतरपुर)। मुस्लिम समुदाय के प्रमुख त्‍योहारों में से एक मुहर्रम का त्यौहार 9अगस्‍त को मनाया गया  मुर्हरम का महीना इस बार 31 जुलाई से आरंभ हो गया था और मुहर्रम का दसवां दिन आशुरा होता है। इसी दिन मुहर्रम मनाया जाता है। इस वर्ष 9 अगस्‍त, मंगलवार को मुहर्रम का 10वां दिन आशुरा है।       

                      •  इमाम हुसैन की शहादत

पैगंबर हजरत मोहम्‍मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रत पर मातम मनाते हैं। मुहर्रम महीने का दसवां दिन सबसे खास माना जाता है। इतिहास में ऐसा बताया गया है कि मुहर्रम के महीने की 10वीं तारीख को कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इस्‍लाम की रक्षा के लिए उन्‍होंने खुद को कुर्बान कर दिया था। इस जंग में उनके साथ उनके 72 साथी भी शहीद हुए थे। कर्बला इराक का एक शहर है, जहां पर हजरत इमाम हुसैन का मकबरा उसी स्‍थान पर बनाया गया था इसलिए निकाले जाते हैं ताजिए मुहर्रम के दिन इस्‍लाम के शिया समुदाय के लोग ताजिए निकालकर मातम मनाते हैं। दरअसल जिस स्‍थान पर इमाम हुसैन का मकबरा बना है, प्रतीकात्‍मक रूप से उसी के आकार के ताजिए बनाकर जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में मुस्लिम लोग पूरे रास्‍ते भर मातम मनाते हैं और साथ में यह भी बोलते हैं, या हुसैन, हम न हुए। यह कहते हुए लोग मातम मनाते हैं कि कर्बला की जंग में हुसैन हम आपके साथ नहीं थे, वरना हम भी इस्‍लाम की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दे देते।कहते हैं कि इन ताजियों को कर्बला की जंग के शहीदों का प्रतीक माना जाता है। इस जुलूस का आरंभ इमामबाड़ा से होता है और समापन कर्बला में होता है और सभी ताजिए वहां दफन कर दिए जाते हैं। मातम को दर्शान के लिए मुस्लिम इस दिन काले कपड़े पहनते हैं। जुलूस में पूर्वजों की कुर्बानी की कहानियां सुनाई जाती हैं, ताकि आज की पीढ़ी इसके महत्‍व को समझ सके और उन्‍हें जीवन के मूल्‍य पता चल सकें पैगंबर हजरत मोहम्‍मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रत पर मातम मनाते हैं। मुहर्रम महीने का दसवां दिन सबसे खास माना जाता है। इतिहास में ऐसा बताया गया है कि मुहर्रम के महीने की 10वीं तारीख को कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी।