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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025

शाश्वत धाम में प्रभात फेरी, शोभायात्रा और पालन झूलाने में गूंजा भगवान का नाम....बालिकाओं ने दिए सारगर्भित वक्तव्य....आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत हुआ आयोजन।

//विनोद कुमार जैन/ 

बकस्वाहा(छतरपुर)। अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के 2624वें जन्म कल्याणक महोत्सव पर शाश्वत धाम में मंगलवार को प्रभात फेरी, शोभायात्रा, आध्यात्मिक वक्तृत्व एवं झूलन कार्यक्रमों का आयोजन भव्यता से संपन्न हुआ। सुबह शाश्वत धाम की बालिकाओं ने प्रभात फेरी निकालकर भगवान महावीर के संदेशों को जनमानस तक पहुँचाया।

प्रभात फेरी के उपरांत बालिकाओं ने जिनेंद्र पूजन कर डबोक जैन समाज द्वारा आयोजित शोभायात्रा में भाग लिया। इस अवसर पर धाम की प्रतिभाशाली बालिकाओं ने अपने प्रभावशाली वक्तव्यों से श्रोताओं को आध्यात्मिक ज्ञान से समृद्ध किया।

शाश्वत लिपि जैन ने कहा — "भगवान महावीर का अहिंसा का संदेश केवल जीवों के प्रति दया नहीं, अपितु विचारों की निर्मलता का प्रतीक है। आज आवश्यकता है उनके सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करने की।"

शाश्वत तनवी जैन ने अपने वक्तव्य में कहा — "भगवान महावीर ने कहा था — 'मनुष्य स्वयं अपना मित्र और शत्रु है।' यदि हम आत्मचिंतन करें तो जीवन में शांति, संयम और समाधान स्वतः प्राप्त होगा।"

शाश्वत सेजल जैन ने अपने उद्बोधन में कहा — "भगवान महावीर का जीवन आत्मबल, अपरिग्रह और सत्यनिष्ठा का उदाहरण है। हमें भी इन मूल्यों के साथ जीने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।"

कार्यक्रम का शुभारंभ शाश्वत आयुषी जैन द्वारा मंगलाचरण से हुआ। उसने स्वरबद्ध शुद्ध उच्चारण में स्तुति प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

इसके पश्चात स्थानीय जैन समाज द्वारा आयोजित साधर्मी वात्सल्य भोज में शाश्वत धाम के समस्त विद्यार्थी, आचार्यगण एवं श्रद्धालुजनों ने सहभागिता की।

सायंकालीन सभा में विशेष आयोजन रखा गया, जिसमें भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के साथ-साथ पू. श्री कानजी स्वामी के मत परिवर्तन दिवस की स्मृति भी मनाई गई। इस अवसर पर शास्त्री तृतीय वर्ष की बालिकाओं ने ज्ञान, भक्ति और भावना से ओतप्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंडित सुरेश शास्त्री ने कहा — "आज की पीढ़ी जब धर्म के मर्म को समझकर मंच से वक्तव्य देती है, तो यह केवल प्रदर्शन नहीं, एक आध्यात्मिक क्रांति का संकेत है।"

पंडित अमित शास्त्री ने कहा — "भगवान महावीर का जीवन मानवता का सर्वोत्तम उदाहरण है। यह उत्सव केवल जयंती नहीं, आत्मजागरण का पर्व है।"

पंडित सम्मेद शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा — "महावीर के सिद्धांतों में ही आज के संघर्षशील जीवन की समस्याओं का समाधान छिपा है। संयम, क्षमा और समत्व— यही उनका सार है।"

विदुषी भाग्यश्री शास्त्री ने कहा — "शाश्वत धाम की बालिकाओं ने जिस आत्मविश्वास से धर्म का मंथन किया है, वह सराहनीय है। यही संस्कार उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में विशिष्ट बनाएंगे।"

अंत में भगवान महावीर के पालन झूलन का आयोजन भगवान के जयघोष और भक्ति रागों के बीच किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में डूबकर झूलन सेवा का लाभ लिया।

शाश्वत धाम परिवार द्वारा आयोजित यह आयोजन यह दर्शाता है कि भगवान महावीर के सिद्धांत आज भी नई पीढ़ी में प्राणवंत हैं और समाज में आध्यात्मिक जागरूकता निरंतर प्रगाढ़ होती जा रही है।