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रविवार, 18 नवंबर 2018

टूटा पड़ा पुल बना चुनावी मुद्दा

विकास के दावो पर बुन्देलखण्ड प्रजेंट न्यूज की पोल खोलती यह रिपोर्ट

चुनावी चर्चा पाटन विधानसभा से....

संवाददाता हर्षित जैन एवं धरम गौतम की रिपोर्ट......

 आठ माह से टूटा पड़ा पुल बना हुआ है मुसीबत। 

टूटा पुल बना पाटन के व्यापारी एवं किसान के लिए मुसीबत। 


पाटन(जबलपुर)| जिले की पाटन विधानसभा के अंतर्गत आने बाले पाटन मनकेड़ी मार्ग पर पाटन से 8 किलोमीटर दूर ग्राम डूडी के पास की पुलिया जो कि बिगत 8 माह से टूटी पड़ी है जिससे पाटन का सीधा संपर्क 10 गांव से टूटा है जिस कारण ग्रामीण 10 से 15 किलोमीटर का चक्कर काट कर पाटन पहुँच रहे है जिसमे मुख्य रूप से कटरा बेलखेड़ा ,कुंवरपुर,जूरी,जूरी कला,माला,घाट माला,हरदुआ,काटी, उड़ना करिया, पोंड़ी, पथरिया लगभग 10 से 15 गांव प्रभावित है।
पाटन मुख्य तहसील कार्यालय होने की वजह से ग्रामीणों का रोज किसी न किसी कार्य से पाटन आना होता है और उन्हें पाटन आने के लिए इस टूटे पुल की वजह से बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है और सबसे अहम बात यह कि इस समय मटर का सीजन है जिसका सबसे ज्यादा उत्पादन इसी क्षेत्र में होता है और अब किसानों के सामने परिवहन की समस्या है कि भाड़ा भी ज्यादा लगेगा और समय भी साथ ही साथ इन गांवों के ग्रामीण जो कि बस से आना जाना करते हैं उनके सामने भी बस परिवाहन बन्द होने की वजह बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है और ये समस्या बिगत 8 माह से है।
 पत्रकार हर्षित जैन ,धरम गौतम, अंकित जैन ने जब यहां के ग्रामीणों से बात की गई तो उनका कहना था कि इस पुल की ओर न तो प्रशासन ध्यान दे रहा है ना ही जनप्रतिनिधि सभी का कहना है चुनाव है आचार संहिता लगी होने की वजह से तो अभी कुछ नही हो सकता केवल आश्वासन से काम चलाना पड़ेगा। राजधानी से जुड़ाव-पाटन ही नही जबलपुर से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत बहुत खराब है और प्रदेश की राजधानी भोपाल को जोड़ने बाला यह मार्ग विकल्प के तौर पर है इस मार्ग से जबलपुर से राजधानी की ओर जाने वालों के लिए 10 किलोमीटर का फासला कम हो जाता है। ग्रामीणों की मुश्किलें बड़ी-चुकी यह क्षेत्र कृषि प्रधान है अधिकतर लोग खेती से जुड़े है अब किसानों के सामने यह समस्या है कि अगर पुल के उस पार खेत तक ट्रैक्टर ले जाना है तो 10 किलोमीटर घूम कर जाने के अलावा कोई विकल्प नही है इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। चुनावी मौसम में क्षेत्र में ऐसी स्थिति बनी हुई है अब आगे देखना यह होगा कि इस टूटे पुल की वजह से जो ग्रामीण किसान परेशान हैं वो किसे अपना मत देतें है और जिस प्रत्याशी पर वो अपना भरोसा जताएंगे वो इनकी इस टूटे पुल की वजह से होने वाली परेशानी को कैसे और कितने जल्द खत्म कर सकेगा।













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