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सोमवार, 27 मई 2019

श्रीजी के गंधोदक से निरोग हुए कुष्ठ रोगी श्रीपाल।

श्रीजी के गंधोदक से निरोग हुए कुष्ठ रोगी श्रीपाल।


//विन्द्रावन विश्वकर्मा//

घुवारा(छतरपुर)। नगर में आयोजित 1008 श्री सिद्धचक्र मण्डल विधान में 32 व 64 अर्घो को समर्पित किया गया।
सौंधर्म इन्द्र श्री सनत कुमार जी एवं शची इंद्राणी श्री मती रूपा जैन ने मण्डल जी पर अर्घ्य समर्पित किए।
इस अवसर पर विधान जी का माहात्म्य समझाते हुए पण्डित उदयचंद जी शास्त्री ने कहा कि सर्वप्रथम यह विधान सती मैनासुंदरी ने किया था जिसके पति राजा श्रीपाल कुष्ठ रोगी थे पर मैनासुंदरी ने अष्ट दिवसीय सिद्धचक्र विधान किया जिसमें भगवान के अभिषेक का जल जब राजा श्रीपाल के शरीर पर छिड़का तो देखते ही देखते उनका शरीर रोग रहित होकर कंचन सा दैदीप्यमान होने लगा यह सिद्ध चक्र विधान की महिमा है।
हम और आपको भी ऐसे ही पूर्ण मनोयोग पूर्वक विधान करना चाहिए। श्रीपाल-मैनासुन्दरी बने श्री निर्मल कुमार जी एवं श्री मती प्रभा जैन ने सभी को गंधोदक दिया। सायंकालीन शास्त्र प्रवचन छात्र विद्वान अंशुल जी भगवा द्वारा किया गया। फूलचंद मॉन्यूमेंट स्कूल के डायरेक्टर डॉ अरुण कुमार जैन ने कहा कि दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति उनके विधालय के छात्रों द्वारा की जायेगी।
इस अवसर पर पुण्यार्जक परिवार द्वारा आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया गया ।