हद की भी अब हुई हद पार फिर "मानवता शर्मसार"।
छतरपुर जिले में लगातार दूसरी बार मानवता शर्मसार।
//रूपेश जैन//
बक्सवाहा(छतरपुर)। मुख्यालय में शव वाहन ना होने के कारण नगर सहित छेत्र के 121 गाँवो की शव वहां संबंधी स्वास्थ्य सुविधाएं भी दांव पर लगी हुई है।केंद्र में शववाहन के ना होने से आये दिन कंधो पर शवों का लाने ले जाने की खबरें अब सामान्य सी बात हो गई है।
परंतु आला अधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि एक दूसरे के पाले को जिम्मेदार ठहराते नजर आते हैं। शुक्रवार को नगर के एक युवा की आत्महत्या के बाद पोस्टमार्टम के लिए लाये शव को स्ट़रेचर सहित कंधे पर ले जाने की शर्मसार करने वाली घटना सामने आई थी कि जिसके बाद आज रविवार को पास के ही एक ग्राम सुनवाहा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से हल्ले साहू पिता प्यारे लाल साहू उम्र 40 वर्ष की मौत हो गई।
डायल 100को सूचना देने पर शव वाहन न होने का हवाला देकर पल्ला झाडा तो परिजन शव को ट्रेक्टर पर रख कर ले आये पंरतु क्षेत्र के दुर्भाग्य ने उनका पीछा नही छोड़ा। और विगत तीन वर्षो से लापरवाही के कारण खुदी पडी सडक पर वारिश के कारण आधे दूर पहुचने के बाद ही ट्रेक्टर फस गया और अस्पताल तक नही पहुँच सका।
जिसके बाद मजबूरन परिजनो ने खटिया को ट्रेक्टर से उतार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक कंधो पर ले आना उचित समझा। जहाँ पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। 
हालांकि सवालो के घेरे मैं रहने बाले स्वास्थ्य विभाग पर कई वार सुलगते सवाल उठते रहे है मगर इस ओर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आते है।
इनका कहना है कि....
बकस्वाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन नही होने की वजह से ऐसे मामले आते है मेने भी प्रतिवेदन भेजा है शव वाहन की माग के लिए।