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रविवार, 1 सितंबर 2019

बदहाल नगर को विकास की दरकार।

बदहाल नगर को विकास की दरकार।


चरमराई बुनियादी सुविधाओं को झेल रही अवाम।



शून्य पड़ा विकास, हालात वद-से-बदतर।




//रूपेश जैन//

बक्सवाहा(छतरपुर)| छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर नगर बक्सवाहा भी आज विकास के नाम पर अछूता बना हुआ है यहां पर रोजगार के अलावा शिक्षा तथा बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी कुछ हद तक दम तोड़ती नजर आती हैं तो बावजूद इसके यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल भी बेहाल देखा जाता है यहां पर रोज-रोज इंसानियत का शर्मसार होना तथा टूटे रास्ते पर बस का बार-बार हिचकोले लेना भी अब सामान्य सी बात है|
             बात अगर यहां की शिक्षा व्यवस्था की करें तो शुरुआत में आईटीआई कॉलेज स्वीकृत हुआ भवन बना लेकिन राजनीतिकरण की चपेट में आने से वह आज महज खंडहर में तब्दील है तो वहीं इसी के उलट हालात उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विगत तीन वर्ष पहले शुरू हुए शासकीय नवीन महाविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएशन की कक्षाएं ना होने के कारण ग्रेजुएशन करके ही कई छात्र-छात्राएं पढ़ाई से नाता तोड़कर अपने हाथ पीछे कर लेते हैं तो वहीं महाविद्यालय की नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य आज भी अधर में लटका पड़ा हुआ है|

रोड के हालात खस्ता,गड्डो में बना है रास्ता

 पूर्व सीएम द्वारा कथित ब्यान की पोल यहां की सड़कों खोल देती हैं बक्सवाहा से सागर मार्ग का निर्माण कर विगत तीन वर्षों से बंद पड़ा है तथा तेज बारिश होने पर बक्सवाहा सागर मार्ग के बीच में मिलने वाले करीब 50 ग्रामों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाता है तो वहीं दमोह जिले की सीमा से जुड़ने वाला बक्सवाहा-सातपुर-हटा मार्ग आज भी विभागीय तनाव एवं राजनीतिकरण का शिकार दिखाई देता है|  तो नजर नगर की सड़कों पर डालें तो आलम यह है कि करीब एक साल पहले नगर में जलापूर्ति के नाम पर खोदी गई सड़को में अब लगभग दो-दो फुट गहरे गड्ढे होने के बाद आज नगर की करीब 70 फ़ीसदी सड़के खुद ही पढ़ी हुई है|
अब बात अगर बिजली व्यवस्था की करें तो महज कुछ घंटों की बारिश में यहां पर बिजली व्यवस्था खच्चर दिखाई देती है तो इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूर्णत: व्यवस्था नाजुक नजर आती है यहां पर कभी स्ट्रेचर पर कुत्ते आराम फरमाते हैं तो कभी स्ट्रेचर पर रखकर मजबूरन शव घर की ओर जाते हैं|

आखिर क्यो नही देते है जिम्मेदार ध्यान???

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है जिस का मंसूबा, वक्त है बदलाव का मगर साहब सवाल तो यह भी उठता है कि यहां पर अभी तक वक्त क्यों नहीं बदला है???
सवाल तो उठना स्वभाविक है तथा प्रश्न तो संसदीय क्षेत्र प्रतिनिधि जी से भी उठता है कि अभी तक बक्सवाहा के विकास का इतना ढीला रवैया आखिर क्यों है????

इनका कहना है कि.....

"सड़क के लिए नया टेंडर जारी हो चुका है,शिक्षा के लिए अभी नए स्कूलों का उन्नयन हुआ है तथा पीजी के लिए भी मांग की जाएगी। एवं रोजगार के लिए किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा अतः क्षेत्रीय युवाओं को ही रोजगार दिया जायेगा।
और आने वाली तीन तारीख को जनसुनवाई कर समस्याओं का मौक़े पर निपटारा किया जाएगा।"

प्रद्युमन सिंह (विधायक,बड़ामलहरा)