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गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019

इलाज के आभाव में जननी ने तोड़ दिया दम,नर्सो ने नही किया इलाज।

इलाज के आभाव में जननी ने तोड़ दिया दम,नर्सो ने नही किया इलाज।

स्वास्थ्य विभाग की हकीकत दिखाती हुई पोल खोलती रिपोर्ट।

//विवेक भास्कर//

ब्यूरो निवाडी। बीते रोज झुंगी झौंपड़ियो मे निवास कर रही एक अर्ध घुमक्कड़ जनजाति समुदाय की आदिवासी महिला ने अस्पताल मे ईलाज के अभाव में दम तोड दिया।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि प्रसव वेदना से पीडित 25 वर्षीय गर्भवती आदिवासी महिला बबीता पत्नि संजय आदिवासी ने 108 वाहन विलम्ब से पहुचने के पूर्व ही बच्ची को डेरो मे जन्म दिया।
और प्रसव उपरान्त जच्चा की हालत बेहद बिगडती गयी ।
जिसे बेहोशी हालत में देख उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अस्पताल में लाया गया।
अस्पताल मे मौजूद नर्सों ने बबीता की बिगडती हालत देखते हुये भी कोई चिकित्सिय उपाय नही किया ।
मरीज के साथ आये परिजनों के साथ नोकझोंक करती रही।
मौजूद नर्सों ने डांक्टर तक को भी नही बुलाया , बताया उस वक्त कोई डांक्टर एमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद नही था।
यह घटना सुबह 8:30 बजे के लगभग की है ।
तरकीबन आधे घंटे बाद आराम से आये डांक्टर के आते ही महिला ने दम तोड दिया ।
मृतिका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में अगर कोई चिकित्सक आपातकालीन  ड्यूटी पर मौजूद होता तो बबीता की जान बचाई जा सकती थी।
डांक्टरो की लापरवाही के कारण बबीता की मौत हुयी है ।
उनका यह भी आरोप है कि महिला स्वास्थ्य सेविकाओं ने भी बेहोश पीडिता की देखरेख मे कोई रूचि नही ली ।
और किसी भी चिकित्सक को  बबीता के ईलाज हेतु बुलाना मुनासिफ नही समझा ।
प्रत्यक्ष दर्शियों के मुताबिक जब 108 वाहन से पीडिता बबीता को  अस्पताल में लाया गया तो वहा कोई भी कर्मचारी और स्टाफ मौजूद नही था ।
तथा देखते ही देखते बबीता की हालत बिगडती गयी।
         आधे घंटे तक तो मरीज के परिजन डांक्टर और नर्सो को इधर उधर ढूढते तलाशते रहे। काफी बाद बताते है कि एक नर्स जच्चा बच्चा केन्द्र मे आराम फरमाती मिली जो आग्रह करने पर परिजनों से उलझ गयी और इसी बीच एक और नर्स आ गयी और दोनों नर्सो ने पीडिता के परिजनों को डाट फटकारना शुरू कर दिया।
ईलाज के अभाव में हुयी बबीता की मौत ने अस्पतालीन व्यवस्था और प्रबंधन पर कई सवालीया प्रश्न चिन्ह खडे कर दिये  है ।
बता दे कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रत्येक गांव और वार्डो मे  आशाओ की नियुक्ति स्वास्थ्य सेविकाओं के रूप में इसलिये की गयी की वह गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर डिलीवरी कराने में जच्चा बच्चा सेंटर तक लाने ले जाने और मरीज की देखभाल का कार्य करे आगनवाड़ी सेविकाओं और कार्यकर्ताओं की भी गर्भवती महिलाओ की देखभाल हेतु महती ड्यूटी होती है किन्तु झुंगी झौपड़ी मे निवास कर रहे आदिवासी महिला बबीता के साथ न तो आशा और दाई एवं आगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायका ने कोई स्वास्थ्य संबंधी रूचि नही दिखाई ।
गर्भवती महिलाओं को महिला बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी के प्रशासनिक आदेश है कि समय समय पर गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी देखभाल करे और दस्तावेजी  पुष्टि करे किन्तु वार्ड क्रमांक 14 मे सेवारत स्वास्थ्य सेविका ANM ने प्रसव के पूर्व भी आदिवासी महिला से कोई सम्पर्क नही किया और न ही जच्चा बच्चा संबंधी जानकारी नही ली गयी ।
यही हाल आगनवाड़ी कार्यकर्ता का रहा है ।
अस्पताल में यह कोई इस प्रकार की पहली घटना नही है ।
इसके पूर्व भी चिकित्सकों की लेट लतीफी और लापरवाही के कारण मरीजो की जान से खिलवाड होता रहा है ।