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मंगलवार, 28 जनवरी 2020

बुंदेलखंड से संबंधित इस बेटी को मिल पद्मश्री पुरुस्कार।

बुंदेलखंड से संबंधित इस बेटी को मिल पद्मश्री पुरुस्कार।



//रूपेश जैन//

बकस्वाहा(छतरपुर)।   भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री मध्य प्रदेश / बुंदेलखंड के सुविख्यात जैन तीर्थ नैनागिरि व द्रोणगिरि के निकटवर्ती  छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील मुख्यालय पर जन्मे स्व. हेमराज जैन की (बिहार गौरव गान लिखने वाली) बेटी डा.शांति जैन को लोक साहित्य पर विशेष कार्य करने और उनकी साहित्य साधना के लिए नवाजा गया है ।
   वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शांति जैन का जन्म 4 जुलाई 1946 को हुआ था , जिन्होंने एम. ए. (संस्कृत एवं हिंदी), पी.एच.डी., डी लिट, संगीत प्रभाकर की शिक्षा प्राप्त की है । बिहार प्रांत के भोजपुर जिले के आरा नगर में स्थित एचडी जैन कॉलेज से प्रोफेसर एवं संस्कृत की विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुई हैं ।
आप आकाशवाणी ,दूरदर्शन की कलाकार एवं कवियत्री हैं ।आप पिछले कई दशक से पटना (बिहार) में रह रही हैं। आपके पिता स्व. हेमराज जैन नौकरी के लिए आरा गए हुए थे।

●  स्वर संगम मे भी है माहिर।

    साहित्य पर पकड़ के साथ-साथ उनकी मधुर आवाज डॉ. शांति जैन की पहचान रही है । 1970 के दशक में रेडियो पर उनका गाया रामायण बेहद लोकप्रिय हुआ था । जयप्रकाश नारायण जब बेहद बीमार होकर घर पर थे तो डॉ. शांति जैन उनके घर जाकर रोज रामायण सुनाया करती थी ।
सम्मान का गौरव
     डॉ. शांति जैन को वर्ष 2009 में संगीत नाटक अकादमी का राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रपति द्वारा मिला था तो मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2008 में राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान दिया था। इसके अलावा के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा शंकर सम्मान , संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा नेशनल सीनियर फैलोशिप सम्मान ,ऑल इंडिया रेडियो का राष्ट्रीय सम्मान ,चैती पुस्तक के लिए बिहार सरकार का राजभाषा सम्मान तथा कलाकार सम्मान सहित अनेको सम्मान प्राप्त हुए हैं ।

●  साहित्य साधना के क्षेत्र मे दिया यह विशिष्ट योगदान।

    आपकी श्रेष्ठतम रचनाओं में एक वृत्त के चारों ओर ,  हथेली का आदमी , हथेली पर एक सितारा (काव्य) ,  पिया की हवेली , छलकती आंखें , धूप में पानी की लकीरें , सांझ घिरे लागल , तरन्नुम , समय के स्वर , अंजुरी भर सपना (गजल, गीत संग्रह ) , अश्मा , चंदनबाला (प्रबंधकाव्य ) , चैती (पुरस्कृत) , कजरी , ऋतुगीत : स्वर और स्वरूप , व्रत और त्योहार : पौराणिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि , उगो है सूर्य , लोकगीतों के संदर्भ और आयाम (पुरस्कृत) , बिहार के भक्तिपरक लोकगीत , व्रत-त्योहार कोश , तुतली बोली के गीत (लोक साहित्य) , वसंत सेना , वासवदत्ता , कादंबरी , वेणीसंहार की शास्त्रीय समीक्षा (क्लासिक्स) , एक कोमल क्रांतिवीर के अंतिम दो वर्ष ( डायरी)  सहित कई दर्जन लोकप्रिय किताबें लिख चुकी हैं । आप कई संस्थानों की पदाधिकारी व सदस्य रह चुकी हैं और 75 साल की उम्र में भी डॉ. शांति जैन आज भी लेखन कला में काफी सक्रिय हैं ।
क्या है पद्मश्री सम्मान।
 भारत सरकार द्वारा आम तौर पर सिर्फ भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला भारत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है , जो देश के लिए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों कला, शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा आदि में बहुमूल्य विशिष्ट योगदान व असाधारण प्रदर्शन करने वालों को मान्यता प्रदान करने के लिए दिया जाता है , जो भारत के नागरिक पुरस्कारों के पदानुक्रम में यह भारतरत्न की श्रंखला मे चौथा पुरस्कार है , जिसकी स्थापना 1954 में की गई थी । पद्म पुरस्कारों की सिफारिश राज्य सरकार / संघ राज्य प्रशासन , केंद्रीय मंत्रालय / विभाग के साथ-साथ उत्कृष्टता संस्थानों आदि से प्राप्त की जाती है । इसके बाद एक समिति इन नामों पर विचार करती है । पुरस्कार समिति जब एक बार सिफारिश कर देती है , फिर प्रधानमंत्री , गृहमंत्री और राष्ट्रपति इस पर अपना अनुमोदन देते हैं और इसके बाद गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन सम्मानो की घोषणा की जाती है । यह सम्मान भारत देश के  महामहिम राष्ट्रपति महोदय के कर कमलों से सौंपा जाता है ।

●  जानिए क्या बोली सम्मान मिलने के बाद डॉ शांति।

  डॉ. शांति जैन ने कहा कि सम्मान मिलने की खुशी है , लेकिन यह थोड़ी देर से मिला है । सम्मान मिलने से लोगों का ध्यान जाता है , यह अच्छी बात है। सम्मान हमारे अंदर उत्साह भरता है ,ऊर्जा मिलती है ।