बक्सवाहा(छतरपुर)। बकस्वाहा के पंचायत एवं नगर के ले लिए बने पशु अस्पताल का है जहाँ गाय बीमार पढ़ी पढ़ी खुद दम तोड़ देती पर डॉक्टर साहब के दर्शन नही हो पाते आएदिन कही सड़क हादसे में घायल हुए जानवर या फिर वारिश से बीमार होते जानवर दम तोड़ते देखे जा सकते है पर जिम्मेदार कभी ये जिम्मेदारी समझे ये संभव नही लगता
ज्ञात हो कि पशु चिकित्सालय में पदस्थ डाक्टर अहिरवार के दर्शन भी लोगों को दूर्लभ है या फील्ड के नाम पर या जिला अस्पताल में काम के नाम पर बाहर रहते है और अस्पताल में यदाकदा ही देखे जाते हां उनकी गैर मौजूदगी में उनके कृपापात्र पैसे बटोरते रहते है
ग्रामीणों और पशुमालिकों द्वारा उक्त संबंध की शिकायतें भी वरिष्ठ अधिकारियों से मौखिक लिखित और समाचार पत्रों के माध्यम से की गई परंतु स्थित आज भी जस की तस है
● शोपीस बने अस्पताल में डॉक्टर नही मिलते।
जैसेतैसे गांव से पशुपालक अपनी गाय या जानवर चिकित्सालय लेकर पहुँचते पता चलता है कि डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण गाय ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।● एक सप्ताह में एक दिन आते डॉक्टर...मूक पशु हो रहे इस लापरवाही का शिकार।
पशु चिकित्सालय में पदस्थ डाक्टर जे एल अहिरवार पशुचिकित्सा क्षेत्र अधिकारी की बेखौफ चल रही मनमानी और मूक पशुओं की इलाज के अभाव में हो रही असमय मौतों से त्रस्त।ज्ञात हो कि पशु चिकित्सालय में पदस्थ डाक्टर अहिरवार के दर्शन भी लोगों को दूर्लभ है या फील्ड के नाम पर या जिला अस्पताल में काम के नाम पर बाहर रहते है और अस्पताल में यदाकदा ही देखे जाते हां उनकी गैर मौजूदगी में उनके कृपापात्र पैसे बटोरते रहते है
ग्रामीणों और पशुमालिकों द्वारा उक्त संबंध की शिकायतें भी वरिष्ठ अधिकारियों से मौखिक लिखित और समाचार पत्रों के माध्यम से की गई परंतु स्थित आज भी जस की तस है