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सोमवार, 7 मार्च 2022

समाज में उन्नति के शिखर पर आगें बढ़ रहीं हैं महिलाएं:- रूपेश जैन

नारी शक्ति की अनूठी मिशाल पेश करने वाली तीन महिलाओं की कहानी

//रूपेश जैन//
युवा पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता

लेख:- बदलती दुनिया में नये भारत का जब इतिहास लिखा जाएगा, निश्चित ही भारतीय नारी के स्वावलंबी स्वरूप को भी गिना जाएगा।

             प्राचीन भारत का इतिहास हमारे अतीत की उन रेखाओं को भी दर्शाता है कि जब एक काल में महिलाओं को पूजनीय सम्मान दिया गया तो एक काल में महिलाओं के सम्मान को विस्मृति के गर्त में भी धकेल दिया गया. परंतु अब वर्तमान उस बीते हुए अतीत से परे है जहां अब आजाद भारत की नारी स्वतंत्र है, शिक्षित है, स्वावलंबी है और सशक्त है जो देश की प्रगति का एक महत्वपूर्ण अंग भी है।

                लेकिन यह बात भी सही है कि भारत विविधताओं से भरा है जहां एक ओर भारतीय नारीत्व आज भी बेड़ियों में जकड़ा है तो वहीं दूसरी ओर अनेक महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रभाव देश की अमिट छाप पर गहरा है। जहां पर वह शिक्षक भी है तो वह पुलिस अधिकारी, स्वतंत्र पत्रकार भी है तो वहीं वह किसी की बेटी, बहू, पत्नी और किसी की मां भी है! वह भारतीय नारी है साहब जो अपने रिश्तो को बखूबी निभाते हुए देश सेवा का कर्तव्य भी अदा कर रही है।

08 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इंदौर क्षेत्र में अलग-अलग कार्यरत ऐसी तीन महिलाओं की कहानी जिनका कार्य भारतीय समाज को है प्रेरणास्रोत-

     परिवार के साथ दो विभागाध्यक्षों की संभालें कमान

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जन्मी बेटी बचपन से ही होनहार रहीं जिसने कनाड़ा में वर्ल्ड यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व सहित समाज सेवा के क्षेत्र में अन्य उपलब्धि हासिल की है तथा जो अब वर्तमान में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रेखा आचार्य मध्यप्रदेश के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के दो विभागों में विभाग अध्यक्ष के रूप में पदस्थ हैं. तो साथ ही एक विभाग में प्रोफेसर के रूप में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहीं हैं। अवश्य ही पारिवारिक जीवन के साथ-साथ, तीन-तीन जिम्मेदार पदों को संभालना एक चुनौती रहता है, लेकिन वह भारतीय नारी है जनाब जो चुनौती का भी हंसकर मुकाबला करती है।

                प्रोफेसर रेखा आचार्य महिलाओं के लिए भी अपनी बात रखते हुए कहतीं हैं कि आप केवल एक दिन अपने लिए मत निकालिए क्योंकि हर दिन आपका है. और इसके अलावा समस्याओं से घबराना नारी की नियत में नहीं है उसका डटकर मुकाबला करना ही असली नारी का परिचय है।

                 महिला सुरक्षा के लिए तत्पर मनीषा

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले की बेटी हाल में इंदौर में एडिशनल डीसीपी के पद पर पदस्थ है. एवं इसके अतिरिक्त वह एडिशनल डीसीपी महिला सुरक्षा व ऐजेके, स्टाफ ऑफीसर आईजी जोन इंदौर का भी चार्ज संभाल रहीं हैं।

           हाल में एक माह पहले उनकी एक किताब "लैंगिक अपराधों की वैज्ञानिक विवेचना एक परिचय" प्रकाशित हुई है। एवं वह कहतीं है कि इंदौर के महिला थाने व महिला डेस्को का सुपर विजन उनके द्वारा किया जाता हैं तथा पीटीसी में पोस्टिंग के दौरान लगभग पांच हजार महिला कांस्टेबलों को उम्दा ट्रेनिंग भी दी गई हैं।

             साथ ही वह महिलाओं के लिये संदेश देते हुए कहती हैं कि महिलाएं स्वयं को कमजोर माने तो यह हमारी ही गलती है क्योंकि ईश्वर ने हमकों असीमित शक्ति प्रदान की है, जिसको पहचान कर सही दिशा में प्रयोग करना है और खुद को कभी भी अशक्त नहीं समझना है।

           गर्भवती होने के साथ भी 10-12 घंटे कार्य

इंदौर की एक महिला पत्रकार कनुप्रिया सत्तन एक टीवी चैनल में संपादक हैं जिन्होंने अपने संस्थान के माध्यम से "मर्दानी" कार्यक्रम प्रसारित कर समाज में हटके कार्य करने वाली महिलाओं के कार्यों को प्रकाशित किया व उनके नारीत्व को संबल प्रदान किया है। अभी वर्तमान समय में कनुप्रिया सत्तन स्वयं ही गर्भवती है. परंतु फिर भी वह घरेलू कार्य के अलावा 10-12 घंटे अपने संस्थान के लिए देती हैं।

               वह महिलाओं के लिए कहतीं है कि किसी महिला को यह नही समझना चाहिए कि वह किसी से कम है, क्योंकि बेटी है तो क्या हुआ उसे पढ़ने और आगे बढ़ने का हक तो है।