//सौरभ जैन//
बक्सवाहा(छतरपुर)। भारत जैसे देश में जहां 80 प्रतिशत आबादी गांवों में बस्ती है वहां पंचायती राज का अपना अलग ही महत्त्व है जमीनी लोकतंत्र और विकाश को बढ़ावा देने वही ग्रामीण क्षेत्रों में बसने वाले लोगो के सामाजिक और आर्थिक विकास में प्रगति लाने के लिए शासन ने पंचायती राज लागू किया लेकिन बकस्वाहा जनपद पंचायत में आने वाली पंचायतों में शासन का पंचायती राज का सपना अधूरा दिख रहा है यहां आम लोगो को शासन की योजनाओं का लाभ पाने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है तो वही जानता द्वारा चुने जनप्रतिनिधि (सरपंच) को भी विकाश कार्य करने के लिए कमीशन देनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन यापन करने वाले लोगो का जीवन स्तर सुधारने के लिए शासन अनेक जन कल्याणकारी योजनाएं चला रही है लेकिन इन योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को बखूबी नही मिल रहा है
यू तो हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए बकस्वाहा जनपद कार्यालय के चक्कर काटना अब आम बात है
हाल ही में जिला पंचायत सीईओ तपस्या सिंह ने बकस्वाहा जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले लगभग आधा दर्जन गांवों में जाकर विकास कार्यों का निरीक्षण किया निरीक्षण के दौरान लम्बे समय से परेशान ग्रामीण शिकायती आवेदन लेकर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे जहां लोगो ने अपनी आपबीती जिला पंचायत सीईओ को सुनाई।
शिकायती आवेदन लेकर पहुंची नन्नाई लोधी बताती है कि मेरे पुत्र की मृत्यु उपरांत पंचायत जाकर सूचित किया था पर संबल योजना का लाभ दिलाने के नाम पर मुझसे 15000रूपये मांगे जा रहे है वही कुही निवासी बबलू अठया बताते है कि रोजगार सहायक द्वारा प्रधान मंत्री आवास की मजदूरी की राशि हितग्राहियों के खाते में न डाल कर अपने चहेतो के खातों में डाल कर आहरण कर ली गई देवपुर निवासी रामसखी बाई बताती है कि मेरे पति खिलान लोधी के नाम प्रधान मंत्री आवास स्वीकृत हुआ था अब उनकी मृत्यु हो गई मुझसे आवास की कार्यवाही करने के नाम पर सचिव ने दो हजार रूपए ले लिए पर आवास नहीं मिला साथ ही जब बकस्वाहा सी ई ओ से शिकायत की तो उन्होंने ने भी कुछ नही किया ऐसे कई और शिकायती आवेदन देने क्षेत्रीय लोग जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे जिस पर जिला पंचायत सीईओ तपस्या सिंह ने खुद ही मामलो की जांच कराकर कार्यवाही की बात कही।
बकस्वाहा जनपद भ्रष्टाचार के मामलो के चलते हमेशा सुर्खियों में रहती है
फिर चाहे मनरेगा में जेसीबी से काम करवाने की बात हो या फिर
फर्जी बिलों के आधार पर पैसे निकालने की बात हो या फिर निर्माण कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार की बात हो यहां कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाती और वही कमीशन के नाम पर अधिकारी शमिल है यही कारण है कि शासन की जान कल्याणकारी योजनाएं हितग्राहियों तक समय से नहीं पहुंच पाती है।
• जनप्रतिनिधि भी परेशान।
आम लोगो के साथ साथ जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधि(सरपंच)भी इस सिस्टम से खासे परेशान हैं ग्राम पंचायत गुगवारा की महिला सरपंच भागवती प्रजापति भी शिकायती आवेदन लेकर जिला पंचायत सीईओ के पास पहुंची जिसमे उन्होंने रोजगार सहायक पर विकाश कार्यों में 12 पर्सेंट कमीशन मांगने और मस्टर लेवर के खातों की जगह अपने चहेतो के खातों में डालने के आरोप लगाए।
अब ऐसे में एक ओर जहां मृतक के परिजनों को संबल योजना का लाभ पाने के लिए भी कमीशन देनी पड़ रही है वही जानता से चुने जनप्रतिनिधि भी अधिकारी कर्मचारियों से प्रताड़ित हो रहे है तो आप समझ सकते है कि बकस्वाहा जनपद पंचायत में किस कदर पंचायती राज का मजाक बनाया जा रहा है।
वही हमने इन मामलों पर जनपद अध्यक्ष रजनी यादव से बात की तो उन्होंने कहां की जिला पंचायत सीईओ से मेने बात की है। ग्रामीण की समस्या के समाधान के लिए गांव में जनसुनाई शिविर लगा कर समस्यो का निवारण करेगे।
